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04 अगस्त 2019

9:23 am

Raksha Bandhan » Know Rakhi Festival Raksha Bandhan in History in hindi


Raksha Bandhan In History
 The traditional Hindu festival ' Raksha Bandhan ( knot of protection ) was came into origin about 6000 years back when Aryans created first civilization - The Indus Valley Civilization . With many languages and cultures , the traditional method to Rakhi festival celebration differs from place to place across India . Following are some historical evidences of Raksha Bandhan celebration from the Indian history .



रक्षा बंधन इतिहास
 में पारंपरिक हिंदू त्योहार 'रक्षा बंधन' (रक्षा की गाँठ) लगभग 6000 साल पहले शुरू हुआ था जब आर्यों ने पहली सभ्यता - सिंधु घाटी सभ्यता बनाई थी।  कई भाषाओं और संस्कृतियों के साथ, राखी के त्यौहार समारोह के लिए पारंपरिक विधि भारत भर में जगह-जगह भिन्न होती है।  भारतीय इतिहास में रक्षा बंधन उत्सव के कुछ ऐतिहासिक प्रमाण हैं।

Rani Karnawati and Emperor Humayun The story of Rani Karnavati and Emperor Humayun is the most significant evidence in the history. During the medieval era, Rajputs were fighting Muslim invasions. Rakhi at that time meant a spiritual binding and protection of sisters was foremost. When Rani Karnawati the widowed queen of the king of Chittor realised that she could in no way defend the invasion of the Sultan of Gujarat, Bahadur Shah, she sent a rakhi to Emperor Humayun. The Emperor touched by the gesture started off with his troops without wasting any time.



रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ रानी कर्णावती और सम्राट हुमायूँ की कहानी इतिहास में सबसे महत्वपूर्ण सबूत है।  मध्यकालीन युग के दौरान, राजपूत मुस्लिम आक्रमणों से लड़ रहे थे।  उस समय राखी का मतलब आध्यात्मिक बंधन था और बहनों की सुरक्षा सबसे महत्वपूर्ण थी।  जब रानी कर्णावती ने चित्तौड़ के राजा की विधवा रानी को महसूस किया कि वह किसी भी तरह से गुजरात के सुल्तान बहादुर शाह के आक्रमण का बचाव नहीं कर सकती हैं, तो उन्होंने सम्राट हुमायूँ को राखी भेजी।  बादशाह द्वारा छुआ गया सम्राट बिना किसी समय बर्बाद किए अपने सैनिकों के साथ शुरू हुआ।
Alexander The Great and King Puru
 The oldest reference to the festival of rakhi goes back to 300 B.C. at the time when Alexander invaded India. It is said that the great conqueror, King Alexander of Macedonia was shaken by the fury of the Indian king Puru in his first attempt. Upset by this, Alexander's wife, who had heard of the Rakhi festival, approached King Puru. King Puru accepted her as his sister and when the opportunity came during the war, he refrained from Alexander


अलेक्जेंडर द ग्रेट और किंग पुरु 
राखी के त्योहार का सबसे पुराना संदर्भ 300 ई.पू.  जिस समय सिकंदर ने भारत पर आक्रमण किया।  ऐसा कहा जाता है कि महान विजेता, मैसेडोनिया के राजा अलेक्जेंडर ने अपने पहले प्रयास में भारतीय राजा पुरु के रोष से हिल गया था।  इससे परेशान होकर, सिकंदर की पत्नी, जिसने राखी त्योहार के बारे में सुना था, राजा पुरु के पास पहुंची।  राजा पुरु ने उसे अपनी बहन के रूप में स्वीकार किया और जब युद्ध के दौरान अवसर आया, तो उसने सिकंदर से परहेज किया

Lord Krishna and Draupathi 
In order to protect the good people, Lord Krishna killed the evil King Shishupal. Krishna was hurt during the war and left with bleeding finger. Seeing this, Draupathi had torn a strip of cloth from her sari and tied around his wrist to stop the bleeding. Lord Krishna, realizing her affections and concern about him, declared himself bounded by her sisterly love. He promised her repay this debt whenever she need in future. Many years later, when the pandavas lost Draupathi in the game of dice and Kauravas were removing her saari, Krishna helped her divinely elongating the saari so that they could not remove it.



भगवान कृष्ण और द्रौपती अच्छे लोगों की रक्षा के लिए, भगवान कृष्ण ने दुष्ट राजा शिशुपाल को मार डाला।  युद्ध के दौरान कृष्ण को चोट लगी और खून बह रहा था।  यह देखकर, द्रौपदी ने अपनी साड़ी से कपड़े की एक पट्टी फाड़ दी थी और रक्तस्राव को रोकने के लिए अपनी कलाई पर बांध लिया था।  भगवान कृष्ण ने उसके प्यार और उसके बारे में चिंता को महसूस करते हुए, खुद को उसके बहन प्रेम से बंधे घोषित कर दिया।  उन्होंने भविष्य में जब भी जरूरत हो, इस कर्ज को चुकाने का वादा किया।  कई साल बाद, जब पाण्डव पासा के खेल में द्रौपती को खो बैठे और कौरव अपनी साड़ी को हटा रहे थे, तो कृष्ण ने साड़ी को बढ़ाने में उनकी मदद की ताकि वे इसे हटा न सकें।
King Bali and Goddess Lakshmi
 The demon king Mahabali was a great devotee of lord Vishnu. Because of his immense devotion, Vishnu has taken the task of protecting bali's Kingdom leaving his normal place in Vikundam. Goddess lakshmi - the wife of lord Vishnu has ecame sad because of this as she wanted lord Vishnu along with her. So she went to Bali and discussed as a Brahmin woman and taken refuge in his palace. On Shravana purnima, she tied Rakhi on King Bali's wrist. Goddess Lakshmi revealed who she is and why she is there. The king was touched by Her and Lord Vishnu's good will and affection towards him and his family, Bali requested Lord Vishnu to accompany her to vaikuntam. Due to this festival is also called Baleva as Bali Raja's devotion to the Lord vishnu. It is said that since that day it has become tradition to invite sisters on sravan pournima to sacred thread of Rakhi or Raksha bandan


राजा बलि और देवी लक्ष्मी
 राक्षस राजा महाबली भगवान विष्णु के बहुत बड़े भक्त थे।  अपनी असीम भक्ति के कारण, विष्णु ने बाली के साम्राज्य को विकुंडम में अपना सामान्य स्थान छोड़ने के लिए सुरक्षित रखने का काम किया।  देवी लक्ष्मी - भगवान विष्णु की पत्नी इस वजह से दुखी हैं क्योंकि वे भगवान विष्णु को अपने साथ चाहती थीं।  इसलिए वह बाली के पास गई और एक ब्राह्मण महिला के रूप में चर्चा की और अपने महल में शरण ली।  श्रावण पूर्णिमा पर, उन्होंने राजा बलि की कलाई पर राखी बांधी।  देवी लक्ष्मी ने खुलासा किया कि वह कौन है और वह क्यों है।  राजा को उसके और भगवान विष्णु की अच्छी इच्छा और उसके और उसके परिवार के प्रति स्नेह से स्पर्श हुआ, बाली ने भगवान विष्णु से वैकुंठम जाने का अनुरोध किया।  इस त्यौहार के कारण बेलवा को बाली राजा की भगवान विष्णु की भक्ति भी कहा जाता है।  ऐसा कहा जाता है कि उस दिन के बाद से राखी या रक्षा बंधन के पवित्र धागे में बहनों को आमंत्रित करने की परंपरा बन गई है

12 अप्रैल 2019

1:04 pm

जिस दासी के कारण से श्रीराम को वनवास हुआ वह मंथरा वास्तव में कौन थी

रामायण में मंथरा एक ऐसा पात्र है जिसके कारण भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मणजी को वनवास जाना पड़ा. श्रीराम को वनवास जाना पड़ा उसमे एक तरह से समाज का और देवताओं का कल्याण ही था क्योंकि श्रीराम ने वनवास के दौरान ही रावण का अंत किया था. श्रीराम को अगर वनवास नहीं होता तो श्रीराम रावण का वध करके अपना अवतार कार्य कैसे पूर्ण करते यह भी एक सोचने की बात है.
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दोस्तों रामायण की तरह महाभारत भी एक बहुत बड़ा ग्रंथ है और इस महान ग्रंथ में भगवान राम के चरित्र का वर्णन भी आता है. उस वर्णन के अनुसार जब राक्षसराज रावण से भयभीत होकर देवता ब्रह्माजी की शरण में गए थे तब ब्रहमाजी ने देवताओं को कहा अब रावण का अंत निकट है, तुम सब भी रींछ और वानर रूप में पृथ्वी पर अवतार धारण करो और भगवान राम की सहायता करो.

उस समय देवताओं ने एक दुंदुभी नाम की गंधर्वी को बुलाया और कहा तुम पृथ्वी पर जन्म धारण करो और वहां पर तुम्हे कैकेयी की दासी बनना है और तुम्हे किसी तरह भगवान राम को वन में जाने के लिए सहायता करनी है. उस समय उस दुंदुभी नाम की गंधर्वी ने श्रीराम को वन में भेजने का दायित्व स्वीकार कर लिया.
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उसके बाद वहीँ गंधर्वी पृथ्वी पर कुब्जा के रूप में जन्मी. उस समय उसका नाम मंथरा रखा गया और वहीँ राजा दशरथ की छोटी रानी कैकेयी की दासी बनी थी. उस समय मंथरा ने अपना वह कार्य किया जिस कार्य के लिए देवताओं ने उसे पृथ्वी पर भेजा था. उसने रानी कैकेयी के मन में रामजी के प्रति संदेह उत्पन्न कर दिया जिस कारण से रानी कैकेयी ने राजा दशरथ से श्रीराम को वनवास देने की मांग की और श्रीराम को अपने पिता का वचन पूर्ण करने के लिए वन में जाना पड़ा और फिर आगे के घटनाक्रम में श्रीराम ने रावण का वध करके देवताओं का कार्य संपूर्ण किया और पृथ्वी पर धर्म मर्यादा की स्थापना की.
12:55 pm

फूलन देवी की कुछ अनदेखी बातें और पढ़े एक आम लड़की कैसे बनी डकैत

इनका जन्म 10 अगस्त 1963 में यूपी से एक गोहरा नाम के गांव में हुआ था, लेकिन जन्म के साथ ही उनके साथ जातिगत मतभेद होना स्टार्ट हो गया था। इसके पश्चात 11 वर्ष की उम्र में ही फूलन देवी के घर वालों ने उनकी विवाह करवा दिया, लेकिन फूलन देवी के पति और उनके परिवार के प्रताड़ना से फुलन देवी तंग आ चुकी थी और वह ससुराल छोड़कर अपने पिता के पास वापस आई और मजदूरी में पिता का हाथ बढ़ाने लगी।
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लेकिन इसके बाद जिंदगी में बहुत बड़ी घटना घटित हुई गांव के कुछ लोगों ने मिलकर फूलन देवी का बलात्कार कर दिया और फूलन देवी अपने लिए न्याय के लिए दर-दर भटकने लगे, लेकिन देश के कानून ने उनकी एक बात नहीं सुनी, फिर इसका बदला लेने के लिए उन्होंने हथियार उठाने का मन बनाया।

फिर फूलन देवी की मुलाकात विक्रम मल्लाह से हुई। इन दोनों ने मिलकर डाकुओं का संगठन तैयार किया और फूलन देवी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय चर्चाओं में आने लगे अपना बदला लेने के लिए उन्होंने 1981 को जिन लोगों ने उनका बलात्कार किया था। उनकी हत्या कर दी। इसके बाद पूरे चंबल में फूलन देवी का खौफ आ गया और सरकार ने फूलन देवी को पकड़ने का फरमान जारी किया, लेकिन पुलिस फूलन देवी को पकड़ने में कामयाब नहीं हो पाई।
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और 1983 की तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने फूलन देवी को सरेंडर करने के लिए बोला। उससे पहले गवर्नमेंट से फूलन देवी ने कुछ मांगे रखी टैली उनकी किसी भी साथी को मृत्युदंड नहीं दिया जाएगा और दूसरी उनके किसी भी शादी को 8 वर्ष से ज्यादा जेल में नहीं रखा जाएगा और सरकार ने फूलन देवी की सारी शर्तें मान ली।

मगर 11 वर्ष तक फूलन देवी को बिना कोई कैसे चलाएं जेल के अंदर रखा गया। जिसके पश्चात 1994 को समाजवादी सरकार की और सरकार ने फूलन देवी को रिहा करवा दिया और 1996 में समाजवादी पार्टी ने फूलन देवी को अपनी पार्टी की तरफ से चुनाव लड़ने के लिए बोला और फूलन देवी मिर्जापुर सीट से संसार बनने में सफल हुई और दिल्ली पहुंच गई।

इसके पश्चात 2001 में शेर सिंह राणा ने फूलन देवी के निवास में फूलन देवी की हत्या कर दी और कहा कि ये सर्वेणो की मौत का बदला है, लेकिन कई जगह में फूलन देवी की हत्या को राजनीतिक षड्यंत्र भी माना गया। इस तरह से फूलन देवी की जिंदगी का अंत हो गया और अपनी एक स्टोरी हो। हिंदुस्तान में छोड़ गई जानकारी के लिए आपको बताना चाहते है, कि फूलन देवी पर बैंडिट क्वीन नाम की फिल्म भी बन चुकी है। जिसे शेखर कपूर ने डायरेक्ट किया था, लेकिन इस फिल्म से फूलन देवी को आपत्ति होने की वजह से इस फिल्म को सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया।

01 अप्रैल 2019

8:37 am

भारत का एक ऐसा मंदिर जहां रात रूकने वाला नहीं देख पाता है सुबह का सूरज, डरावनी है सच्चाई

 हमारे देश मे कई धर्मो के लोग रहते है। जिसके चलते हर जगह पर मंदिर मस्जिद चर्च व गुरूद्वारे मिल जाते है। इनमे से कई सारे मंदिर है जो अपने चमत्कारों की वजह से पूरी दुनिया मे फैमस है। आज आपको एक ऐसे ही मंदिर के बारे बता रहे है. जिसके बारे में जानकर आप सहम जाएगें।
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दोस्तों यह मंदिर किसी अन्य देश मे नहीं बल्कि हमारे देश मे हैं। इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि यहां पर आज भी उलहा और उदल आकर माता की पूजा करते हैं। कहा जाता है कि जब इन दोनों की पूजा पूरी हो जाती है इसके बाद ही मंदिर के गेट खोले जाते हैं। जिस मंदिर की हम बात कर रहे है।

वह सतना जिले के मैहर तहसील स्थित त्रिकूट पर्वत पर है जिसे मैहर देवी का मंदिर कहा जाता है। बताया जाता है कि माता ने दोनों भाइयों को अमर होनें का आशिर्वाद् दिया था। जिसके बाद दोनों यहां पर पूजा करने आते हैं। इतना ही नहीं कई कहानियों के अनुसार अल्हा माता को माई कहकर बुलाता था।

जिसके बाद से माता यहीं पर विराजमान हो गई। और माता का नाम शारदा माई हो गया। चौंकाने वाली बात तो यह है कि इस मंदिर में रात को 2 बजे से लेकर 5 बजे तक कोई प्रवेश नहीं कर सकता है। यहां पर इस दौरान हर इंसान का प्रवेश वर्जित है।
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इस मंदिर के बारे में लोगों की मान्य्ता है कि अगर इस दौरान किसी ने इसमे प्रवेश किया तो उसकी मौत हो जाती है। मामले की जानकरी देते हुए यहा के एक बुजुर्ग का कहना है कि यहा पर पहले भी कई सारे लोगों ने रूकने का प्रयास किया था. लेकिन सभी की मौत हो गई है। माता का मंदिर पहाड़ के ऊपर है। जिसके चलते यहा पर 1060 सीढिया चढ़कर जाना पड़ता है.

29 मार्च 2019

9:30 am

The world's richest temple, दुनिया का सबसे अमीर मंदिर, अरबों का है खजाना

नमस्कार दोस्तों स्वागत है आपका हमारे चैनल पर। 
इंडिया एक धार्मिक देश है। लोगों की भगवान के प्रति गहरी आस्था और विश्वास के कारण ही इंडिया के हर इलाके में एक मंदिर पाया जाता है। इंडिया में वैसे तो हर धर्म और समाज के लोग रहते है, लेकिन सभी की भगवान की प्रति पूरी श्रद्धा है। भगवान के प्रति समर्पित श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों में इतना अधिक दान किया जाता है, जिससे करोंड़ों लोग अमीर बन जाए। हम आपको अब उस मंदिर के बारे में बताते है, जो की दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है।

पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम

पद्मनाभस्वामी मंदिर, तिरुवनंतपुरम

केरल राज्य के तिरुवनंतपुरम शहर में स्थित भगवान श्रीविष्णु को समर्पित पद्मनाभस्वामी मंदिर भारत का ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया का सबसे अमीर मंदिर है। तिरुवनंतपुरम केरल की राजधानी है, जो अपनी प्रसिद्ध और आरामदायक नाव की सवारी के लिए भी जाना जाता है। यह मंदिर द्रविड़ शैली की वास्तुकला में बनाया गया है, जो दक्षिण भारत में प्रचलित है। मंदिर के अंदर के स्थित कलशों को हाल ही में खोला गया था। ये सोने, चांदी और हीरों से भरे हुए मिले है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि खजाने की कीमत 1 ट्रिलियन डॉलर है, जो कि भारत के सबसे अमीर व्यक्ति और जिओ के मालिक अनिल अंबानी की कुल संपत्ति से भी अधिक है। पद्मनाभस्वामी मंदिर में श्रद्धालुओं की गहरी आस्था और श्रद्धा ही है कि वे यहां दर्शन के लिए आते है और अरबों रूपए का दान करते है। ऐसा भी अनुमान लगाया जा रहा है कि किसी भी और मंदिर में इतनी अधिक धनराशि कभी भी नहीं हो सकेगी। इस मंदिर की संपत्ति लगातार बढ़ती भी जा रही है।

दोस्तों आप भी पद्मनाभस्वामी मंदिर के दर्शन के लिए अवश्य जाए। यदि आपको यह खबर पसंद आई तो लाइक करें और जय श्री कृष्ण कमेंट करें। हम आपके लिए रोचक तथ्यों से जुड़ी खबरों को हमेशा इसी तरह लाते रहेंगे। आप सभी का दिन शुभ रहे... राधे...राधे...।। धन्यवाद ।।

24 मार्च 2019

5:12 pm

संभोग से पहले भूल से भी मत करना ये 2 काम, दूसरा काम लड़के ज़्यादा करते है

संबंध बनाना तो हर किसी को पसंद होता है फिर चाहे वो लड़का हो या लड़की हो हर कोई संबंध जरूर बनाता है लेकिन कई बार संबंध बनाने से पहले कुछ लड़के ऐसे गलती कर देते है जिसकी वजह से उन्हें बाद में परेशानियां होने लगती है और असल में लड़को को भी नहीं पता होता है की संबंध बनाने से पहले कौन से काम करने की वजह से नुकसान होता है, इसीलिए आज हम आपको बताने जा रहे है की संबंध बनाने से पहले कौन से काम नहीं करना चाहिए।




कई सारे व्यक्ति शारीरिक शक्ति बढ़ाने के लिए संबंध बनाने से पहले पेट भर के खाना खा कर लेते है लेकिन ऐसा कभी नहीं करना चाहिए क्योंकि संबंध बनाने से पहले पेट भर के खाना खाने से व्यक्ति को सुस्ती आने लगती है और पेट में खाना भी जल्दी नहीं पच पता है इसीलिए कभी भी संबंध बनाने से 2 घंटे पहले ही खा खाए.
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कई सारे व्यक्ति संबंध बनाने से पहले ऐसी कई सारे चीज़े खा लेते है जिससे की उन्हें ताकतवर महसूस होता है लेकिन संबंध बनाने से पहले कभी भी व्यक्ति को खट्टी चीजों सेवन नहीं करना चाहिए क्योंकि खट्टी चीज़ो का सेवन करने से व्यक्ति का शुक्राणु पतला हो जाता है, जिसकी वजह से व्यक्ति ज़्यादा देर तक संबंध नहीं बना पाते है.

एक खास टिप्स

अगर आप सही तरह स संबंध बनाना चाहते है तो संबंध बनाने से पहले एक गिलास पानी पिये, क्योंकि पानी पीने से आपके शरीर में ऊर्जा बनी रहेगी जिससे आपको जल्दी थकान महसूस नहीं होगी और आप लंबे समय तक संबंध बना पायेगे।ऐसी ही टिप्स के लिए हमे फॉलो जरूर करे और हमर खबर जरूर पढ़े, उसमे आपको एक और नयी टिप्स पता चलेगी।


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22 मार्च 2019

6:36 am

क्यों देवराज इंद्र ने दिया था समस्त स्त्रियों को मासिक धर्म का श्राप, यह था इसका कारण

पौराणिक कथाओं में स्त्रियों को मासिक धर्म आने का कारण देवराज इंद्र को बताया गया है | ऐसा माना जाता है कि इंद्र के श्राप के कारण ही ऐसा हुआ था | आइये जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कथा के बारे में |

Ngallinone

एक बार स्वर्गलोक पर दैत्यों ने धावा बोल दिया दिया और देवराज इंद्र से उनका सिंघासन छीन लिया गया |देवराज इंद्र इसके समाधान के लिए ब्रह्माजी के पास पहुंचे | ब्रह्मा ने इंद्र से कहा कि वे भूलोक जाकर किसी परमज्ञानी मनुष्य की सेवा करें, जिसके बाद उन्हें स्वर्ग दोबारा प्राप्त हो जाएगा | देवराज ने ऐसा ही किया और एक ब्रह्मज्ञानी की सेवा में जुट गये |



उस परमज्ञानी मनुष्य की माता एक दैत्य ही थीं इसलिए इंद्र जो भी पूजा सामग्री उपयोग करते वे सभी अनजाने में असुरों को ही प्राप्त हो रही थीं | जब देवराज इंद्र को इस सत्य का ज्ञान हुआ तो वे क्रोध से भर उठे और उस ब्रह्मज्ञानी मनुष्य की हत्या कर दी |इंद्र को ब्रह्म हत्या का घोर पाप लगा | इस पाप से मुक्ति के लिए उन्होंने सहस्त्रों वर्ष तक भवगान श्री हरि विष्णु की तपस्या की | भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर देवराज इंद्र को सुझाव दिया कि वे इस पाप को पृथ्वी, जल, पेड़ और स्त्रियों में बाँट सकते हैु लेकिन इस पाप के एवज में उन्हें सभी को कुछ वरदान भी देना होगा |


देवराज ने पृथ्वी को श्राप देने के बाद उन्होंने वरदान दिया कि चाहे जितनी चोट की जाए पृथ्वी के घाव पुनः भर जाएँगे | पेड़ों को श्राप दिया लेकिन वरदान में उन्होंने कहा कि पेड़ पौधे स्वयं को कभी भी पुनः जीवित कर सकेंगे | जल को वरदान दिया कि वह पृथ्वी पर उपस्थित सभी वस्तुओं को स्वच्छ कर सकेगा | स्त्रियों को इंद्र ने मासिक धर्म का श्राप दिया लेकिन इसके एवज में उन्होंने स्त्रियों को पुरुषों की अपेक्षा अधिक रति आनंद प्राप्त होने का वरदान भी दिया | आगे भी ऐसी ही ज्ञानवर्धक जानकारी पाने के लिए कृपया हमें फॉलो करें |

21 मार्च 2019

8:02 am

राशिफल दिनांक 21 मार्च: आज होली के दिन बन रहे हैं ये शुभ योग, जानें किन राशियों के लोगों की चमकेगी किस्‍मत

राशिफल दिनांक 21 मार्च :
राशिफल

1. मेष राश‍िफल / Aries Horoscope Today: आप आज व्यवसाय में सफलता की प्राप्ति करेंगे। धन के आगमन की संभावना रहेगी। आई टी और मीडिया में जॉब करने वालों को सफलता मिलेगी। किसी नए व्यवसाय के बारे में योजना बना सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में तनाव रहेगा। लव लाइफ में भी किसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। पीला रंग शुभ है।

2. वृष राश‍िफल / Tauras Horoscope Today: धन का व्यय होगा। आईटी तथा बैंकिंग की सर्विस करने वाले उन्नति करेंगे। स्टूडेंट्स अपने करियर में सफलता से प्रसन्न रहेंगे। जीवन साथी का सहयोग प्राप्त होगा। लव लाइफ शानदार रहेगी। हनुमान जी के मंदिर में कपूर जलाएं। हरा रंग शुभ है।

3. मिथुन राश‍िफल / Gemini Horoscope Today: राजनीति से सम्बद्ध जातकों को सफलता की प्राप्ति होगी। कई दिनों से लंबित कार्य पूर्ण होगा। लव लाइफ शानदार रहेगी। जॉब में उन्नति होगी। दाम्पत्य जीवन में खुशहाली रहेगी। गाय को गुड़ खिलाना पुण्य दायी है। विष्णुसहस्त्रनाम का पाठ करें। हरा रंग समृद्धि कारक है।

4. कर्क राश‍िफल / Cancer Horoscope Today: आज सफलता मिलेगी। घर के कार्यों में व्यस्त रहेंगे। मीडिया और आईटी के जातक सफलता की प्राप्ति करेंगे। राजनीतिज्ञों के लिए आज का दिन सफल और भाग्यवृद्धि कारक है। लव लाइफ अच्छी रहेगी। स्वास्थ्य से सुख मिलेगा। भाग्य वृद्धि के लिए भगवान शिव की पूजा करें। सफेद रंग शुभ है।

5. सिंह राश‍िफल / Leo Horoscope Today: आई टी और मीडिया फील्ड में आपके कार्यों से आपके अधिकारी प्रसन्न रहेंगे। छात्रों को नवीन अवसरों की प्राप्ति होगी। किसी मित्र के आगमन से खुश रहेंगे। लव लाइफ में थोड़ा तनाव रहेगा। बहते जल में तांबा प्रवाहित करें। आज का शुभ रंग पीला है।

6. कन्या राश‍िफल / Virgo Horoscope Today: संतान को सफलता की प्राप्ति होगी। आईटी और फिल्म फील्ड के जातक अपने काम में उन्नति करेंगे। प्रगति के मार्ग में आने वाली बाधाएं खत्म होंगी। धन के आगमन के रास्ते बनेंगे। आज आपकी लव लाइफ अच्छी रहेगी। हेल्थ बेहतर रहेगा। हरा रंग शुभ है।

7. तुला राश‍िफल / Libra Horoscope Today: मीडिया में कार्य करने वाले जातकों को आज अपने कार्यों में संघर्ष करना होगा। धन का आगमन होगा। आप अपनी प्रगति से खुश रहेंगे। स्वास्थ्य सुख में परेशानी हो सकती है। बहते जल में नारियल प्रवाहित करें। सूक्त का पाठ करें। हरा रंग शुभ है।

8. वृश्चिक राश‍िफल / Scorpio Horoscope Today: आई टी तथा बैंकिंग के लोग अपने करियर को आज नया मोड़ देंगे। आज ऑफिस के कार्यों में रुचि लेंगे। लव लाइफ अच्छी रहेगी। दाम्पत्य जीवन में जीवन साथी को महत्व दें। स्वास्थ्य को लेकर प्रसन्न रहेंगे। हनुमानचालीसा का पाठ करें। पीला रंग शुभ है।

9. धनु राश‍िफल / Sagittarius Horoscope Today: छात्र सफलता की प्राप्ति करेंगे। आईटी और बैंकिंग फील्ड के जातकों के लिए कई नवीन अवसर उपलब्ध रहेंगे। शिक्षा में प्रगति होगी। लव लाइफ अच्छी रहनी चाहिए। आज आपकी हेल्थ अच्छी रहेगी। नारंगी रंग शुभ है।

10. मकर राश‍िफल / Capricorn Horoscope Today: आज परिश्रम करना होगा। बैंकिंग और आई टी फील्ड के जातक अपने टारगेट को प्राप्त करेंगे। छात्र सफल रहेंगे। लव पार्टनर को शिकायत का अवसर नहीं देंगे। हेल्थ अच्छी रहेगी। गरीबों में अन्न का दान करें। हनुमान जी के मन्दिर जाएं। नीला रंग शुभ है।

11. कुंभ राश‍िफल / Aquarius Horoscope Today: धन का आगमन हो सकता है। जॉब चेंज के अवसर बन सकते हैं। दाम्पत्य जीवन में किसी बात को लेकर तनाव हो सकता है। लव लाइफ सुखी रहेगी। स्वास्थ्य सुख अच्छा रहना चाहिए। गरीबों में अन्न का दान करें। हनुमान जी का ध्यान करते रहें। हरा शुभ रंग है।

12. मीन राश‍िफल / Pisces Horoscope Today: आईटी और फिल्म से सम्बद्ध जातक सफल रहेंगे। लव लाइफ में विवाह की बात रखने का शानदार समय है। श्वांस के रोगी चिंतित रहेंगे। बहते जल में तांबा प्रवाहित करें। विष्णु जी का ध्यान करते रहें। गरीबों में अन्न का दान करें। सफेद रंग समृद्धि कारक है।

दोस्तों राशि के बारे में जानने के लिए हमारे इस वेबसाइट को फॉलो करें

20 मार्च 2019

9:52 am

इतिहास की एक ऐसी रानी जो पहले बनाती हवस का शिकार और बाद में जिंदा जला देती थी

नमस्कार दोस्तों आप लोगों का इस चैनल पर स्वागत है। इतिहास दुनिया में बहुत सारे ऐसे महान राजा और रानी हुए जिनका नाम आज भी लोग गर्व से लेते है। आप लोगों ने इतिहास के कई राजा के बारे में सुना होगा जो अपने क्रूर और दयालु स्वभाव के कारण जाने जाते है। लेकीन आज हम आपको किसी राजा के बारे में नही बल्कि एक बहुत ही खतरनाक और बुद्धीमान रानी के बारे में बताने जा रहे है जिसके कारनामे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे।
रानी एनजिंगा एमबांदी

दोस्तों हम जिस रानी की बात कर रहे है उसे एनजिंगा एमबांदे है। आपको बता दें इस रानी के बारे में कहा जाता है कि इस रानी के पास बहुत तेज दिमाग था। जिसके कारण कोई भी राजा या अन्य लोग इस रानी को परास्त नही कर पाते थे। इस रानी ने राज्य के लालच में अपने भाईयों को भी मरवा दिया था। इस रानी ने अपने शासन काल में बहुत से लोगों को मौत के घाट उतार दिया था।

इतिहास की किताबों में झांकें तो अफ्रीकी देश अंगोला की रानी एनजिंगा एमबांदी एक बहादुर और तेज दिमाग वाली योद्धा के रूप में नजर आएंगी, जिन्होंने 17वीं शताब्दी में अफ्रीका में यूरोपीय उपनिवेशवाद के खिलाफ जंग छेड़ी थी।
लेकिन कुछ लोग उन्हें एक क्रूर महिला के रूप में भी देखते हैं, जिन्होंने सत्ता के लिए अपने भाई को भी मौत के घाट उतार दिया। यहीं, नहीं वह अपने हरम में रहने वाले पुरुषों के साथ एक बार यौन संबंध बनाने के बाद उन्हें जिंदा जलवा देती थीं, लेकिन इतिहासकार एक बात पर राजी होते हैं और वह यह है कि एनिजिंगा अफ्रीका की सबसे लोकप्रिय महिलाओं में से एक हैं।
रानी या एनगोला 
एमबांदू लोगों की नेता एनजिंगा दक्षिण पश्चिम अफ्रीकी देश एनदोंगो और मतांबा की रानी थीं। लेकिन स्थानीय भाषा किमबांदु में एनजिंगा को एनगोला कहा जाता था और यही वो शब्द था जिससे पुर्तगाली लोग इस शब्द को बुलाया करते थे, और ये आखिरकार इस क्षेत्र को अंगोला कहा जाने लगा। इस इलाके को ये नाम तब मिला जब पुर्तगाल के सैनिकों ने सोने और चांदी की तलाश में एनदोंगो पर हमला किया था।


पुर्तगाल के खिलाफ समझौतों की राजनीति 
इसके बाद राजा एनगोला एमबांदी ने अपनी बहन के साथ सत्ता को बांटने का फैसला किया। पुर्तगाली मिशनरियों से पुर्तगाली भाषा सीखने वाली एनजिंगा एक बेहद प्रतिभाशाली रणनीतिकार थीं। ऐसे में जब एनजिंगा बातचीत का दौर शुरू करने के लिए लुआंडा पहुंची तो उन्होंने वहां पर काले, गोरे और कई संकर जातियों के लोगों को देखा। एनजिंगा ने ऐसा नजारा पहली बार देखा था लेकिन वो इसकी जगह किसी और चीज को देखकर आश्चर्यचकित रह गईं।

दरअसल, गुलामों को एक पंक्ति में खड़ा करके बड़े-बड़े जहाजों में ले जाया जा रहा था। कुछ ही सालों में लुआंडा अफ्रीका में सबसे बड़ा गुलामों का अड्डा बन गया, लेकिन जब वह पुर्तगाली गवर्नर जोआओ कोरिए डे सोउसा के साथ शांति वार्ता करने उनके दफ्तर पहुंची तो एनजिंगा के साथ जो व्यवहार किया गया उस पर इतिहासकारों ने टिप्पणियां की हैं, क्योंकि जब वह वहां पहुंची तो उन्होंने देखा कि पुर्तगाली आरामदायक कुर्सियों पर बैठे हुए हैं और उनके लिए जमीन पर बैठने की व्यवस्था की गई थी।
ये देखकर निजिंगा ने एक भी शब्द नहीं कहा और उनकी नजर के इशारे को देखते ही उनका एक नौकर कुर्सी के अंदाज में एनजिंगा के सामने बैठ गया, फिर निजिंगा उसकी पीठ पर बैठ गया और वह गवर्नर के बराबर ऊंचाई पर पहुंच गईं। एनजिंगा ने इस तरह ये बता दिया कि वह बराबरी के स्तर से बातचीत करने आई हैं। बातचीत के लंबे दौर के बाद दोनों पक्ष इस बात पर सहमत हो गए कि पुर्तगाली सेना एनदोंगो को छोड़कर चली जाएंगी और उनकी संप्रभुता को स्वीकार करेंगी।
लेकिन इसके बदले में एनजिंगा इस पर तैयार हुईं कि इस क्षेत्र को व्यापारिक रास्तों को बनाने के लिए खुला छोड़ा जाएगा। पुर्तगाल के साथ रिश्ते बेहतर करने के लिए एनजिंगा ने ईसाई धर्म भी स्वीकार किया जिसके बाद नया नाम एना डे सूजा धारण किया गया। इस वक्त उनकी उम्र 40 साल थी, लेकिन दोनों के बीच बेहतर रिश्ते ज्यादा देर तक नहीं चले और जल्द ही संघर्ष की शुरुआत हो गई।

जब एनजिंगा बनी रानी 
साल 1624 में इनके भाई एक छोटे से द्वीप में जाकर रहने लगे। इसके बाद यहीं उनकी मौत हो गई। एनजिंगा की भाई की मौत को लेकर कई तरह की कहानियां हैं। कुछ लोग कहते हैं कि एनजिंगा ने अपने बेटे की हत्या का बदला लेने के लिए उन्हें जहर दिलवाया। वहीं, कुछ लोग उनकी मौत को आत्महत्या के रूप में भी देखते हैं। लेकिन इस सबके बीच में एमजिंगा एमबांदे ने पुर्तागालियों और कुछ अपने लोगों की चुनौतियों का सामना करते हुए एनदोंगों की पहली रानी बनने का कीर्तिमान बनाकर दिखाया।

अंगोला की नेशनल लाइब्रेरी के निदेशक जाओ पेड्रो लॉरेंको के मुताबिक, अफ्रीका में बीते कई युगों से जारी महिलाओं के शोषण के खिलाफ एनजिंगा एमबांदे एक मुखर आवाज की तरह हैं।" वह कहते हैं, "उनकी तरह ही कई और हस्तियां हैं जो हमें ये समझने में मदद करते हैं कि अफ्रीका में सत्ता के ढांचे में फिट रहने के बावजूद महिलाओं ने इस महाद्वीप के विकास में योगदान दिया है।"
कुछ सूत्र कहते हैं कि एनजिंगा का अंदाज एक रानी के मुताबिक क्रूरता से भरा था। उदाहरण के लिए, इमबांगाला योद्धाओं की मदद लेना जो राज्य की सीमा पर रहते थे ताकि अपने प्रतिद्वंद्वियों को डराकर अपनी स्थिति को मजबूत किया जा सके। कई सालों तक अपने राज्य का नेतृत्व करने के बाद एनजिंगा ने अपने पड़ोसी राज्य मुतांबा पर अधिकार कर लिया। इसके साथ ही अपनी सीमाओं की भी ढंग से हिफाजत की।
ब्राजीली और पुर्तगाली लेखिका जोस एडुआर्डो अगुआलुसा कहते हैं, "क्वीन एनजिंगा युद्ध भूमि में एक महान योद्धा ही नहीं बल्कि एक महान रणनीतिक और राजनयिक थे।" "वह पुर्तगालियों के खिलाफ लड़ी और डचों के साथ दोस्ती की। वहीं, जब दूसरे राज्यों से संघर्ष होता था तो वह पुर्तगालियों से मदद ले लेती थीं।"
इतिहास की एक ऐसी रानी जो पहले बनाती हवस का शिकार और बाद में जिंदा जला देती थी


सेक्स स्लेव से जुड़ी कहानी 
फ्रांसीसी दार्शनिक मार्किस दे सादे ने इतालवी मिशनरी गिओवनी कावेजी की कहानियों पर आधारित एक किताब 'द फिलॉसोफी ऑफ द ड्रेसिंग टेबल' लिखी है। कावेजी ने दावा किया था कि एनजिंगा अपने आशिकों को साथ सेक्स करने के बाद जलाकर मार देती थी।

रानी एनजिंगा के हरम को चिबदोस कहा जाता था और इसमें रहने वाले पुरुषों को पहनने के लिए महिलाओं के कपड़े दिए जाते थे। यही नहीं, जब रानी को अपने हरम में मौजूद किसी पुरुष के साथ सेक्स करना होता था तो हरम के लड़कों को आपस में मौत होने तक लड़ना होता था।
लेकिन जीतने वाले को जो मिलता था वो और भी ज्यादा खतरनाक होता था। दरअसल, ये होता था कि इन पुरुषों को सेक्स के बाद जलाकर मार दिया जाता था। हालांकि, ये माना जाता है कि कावेजी की कहानियां दूसरे लोगों के दावों पर आधारित हैं। ऐसे में इतिहासकार मानते हैं कि इसके कई और वर्जन भी मौजूद हैं।
7:48 am

20 मार्च बुधवार की सुबह होते ही पलट जाएगी, इन राशियों की तकदीर

मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क

आप अपने जीवन में दिन दुगनी रात चौगुनी तरक्की करने में कामयाब होंगे। माता रानी की कृपा दृष्टि आप के ऊपर लगातार बनी रहेगी। आपको समाज में मान सम्मान की प्राप्ति होगी। अचानक धन लाभ होने की भी संभावना है। आपकी सैलरी में बढ़ोतरी होगी, जिससे आपकी धन संबंधी सभी प्रकार की समस्याएं समाप्त हो जाएंगी। और वैवाहिक जीवन में बहुत खुशियां रहेंगी। और आने वाले समय मे आपको करोड़पति बनने से कोई नहीं रोक पायेगा।संतान की ओर से कोई बड़ी खुशखबरी मिल सकती है जो संतान की नौकरी से सम्बन्धित हो सकती है, इस दौरान आपको भाग्य का पूरा साथ मिलेगा।
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सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक

जीवन में बड़ा परिवर्तन होने वाला है. इनके ऊपर मां लक्ष्मी की असीम कृपा रहेगी इन के सभी कार्य सफलतापूर्वक पूर्ण होंगे विद्यार्थियों के जीवन में इस दिन बड़ा परिवर्तन होगा,आने वाले दिनों में आप अपना नाम समाज में रौशन करने में कामयाब रहेंगे। आपका भाग्य आपका पूरा साथ देगा। जिस वजह से आपको कोई बड़ी खुशखबरी भी प्राप्त होगी। और आपकी वाणी में सुधार देखने को मिलेगा। पैसों की स्थिति में जल्दी ही अच्छा बदलाव आ सकता है नौकरी धंधे की तलाश खत्म हो सकती है आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा। बड़े बुजुर्गों का आशीर्वाद प्राप्त होगा।

धनु, मकर, कुंभ, मीन

अचानक बड़ा फायदा मिलने का योग बन रहा है, यदि आपका पैसा कहीं रुका हुआ है तो वह आपको वापस मिल सकता है, कामकाज में आने वाली सभी रुकावटें दूर होंगी, पारिवारिक चिंताएं खत्म हो सकती है, माता पिता का पूरा सहयोग मिलेगा, दोस्तों के साथ अच्छा तालमेल बना रहेगा, आप तनावपूर्ण स्थिति से बाहर निकलने में सफल रहेंगे, आपके जीवन में आने वाली सभी प्रकार की कठिनाइयां समाप्त हो जाएंगी। और व्यापार या कार्य से संबंधित योजनाएं फलीभूत होंगी। घर में नई वस्तु आने के संकेत दिख रहे हैं। प्रेम संबंधों के लिए यह समय आपके लिए उपयुक्त है सुख-शांति की बढ़ोतरी होगी।

कमेंट बॉक्स जाकर जय शनिदेव जरूर लिखें।

17 मार्च 2019

6:45 pm

क्या पाकिस्तान में आज भी मौजूद है वह खंबा जिससे प्रह्लाद को बांधा गया था

भारत की होली के पौराणिक सबूत
पाकिस्तान में
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होली शायद दुनिया का एकमात्र ऐसा त्योहार है, जो सामुदायिक बहुलता की समरस्ता से जुड़ा हुआ है। इस पर्व में मेल-मिलाप का जो आत्मीय भाव अंतरमन से उमड़ता है, वह सांप्रदायिक अतिवाद और जातीय जड़ता को भी ध्वस्त करता है। होली का त्योहार हिरण्यकश्यपु की बहन होलिका के दहन की घटना से जुड़ा है। ऐसी लोक-प्रचलित मान्यता है कि होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था। वस्तुत: उसके पास ऐसी कोई वैज्ञानिक तकनीक थी जिसे प्रयोग में लाकर वह अग्नि में प्रवेश करने के बावजूद नहीं जलती थी।

चूंकि होली को बुराई पर अच्‍छाई की जीत के पर्व का पर्व माना जाता है इसलिए जब वह अपने भतीजे और विष्णु-भक्त प्रहलाद को विकृत और क्रूर मानसिकता के चलते गोद में लेकर प्रज्वलित आग में प्रविष्ट हुई तो खुद तो जलकर खाक हो गई, परंतु प्रह्लाद
बच गए। उसे मिला वरदान सार्थक सिद्ध नहीं हुआ, क्योंकि वह तो असत्य और अनाचार की आसुरी शक्ति में बदल गई थी।
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पौराणिक राज छुपे हैं पाकिस्तान में : ऐतिहासिक और पौराणिक साक्ष्‍यों से यह पता चलता है कि होली की इस गाथा के प्रामाणिक तथ्य पाकिस्तान के मुल्तान से जुड़े हैं यानी अविभाजित भारत से। अभी वहां भक्त प्रह्लाद से जुड़े मंदिर के भग्नावशेष मौजूद हैं। वह खंभा भी मौजूद है जिससे भक्त प्रह्लाद को बांधा गया था।

भारत विभाजन के बाद पाकिस्तान में हिन्दुओं के मंदिरों को नेस्तनाबूद करने का जो सिलसिला चला, उसके थपेड़ों से यह मंदिर भी लगभग नष्टप्राय: हो गया, मगर इसके चंद अवशेष अब भी मुल्तान में मौजूद हैं और वहां के अल्पसंख्‍यक हिन्दू होली के उत्सव को मनाते हैं। जाहिर है, यह पर्व पाक जैसे अतिवादी से ग्रस्त देश में भी सांप्रदायिक सद्भाव का वातावरण बनाता है।


यहां वह स्थान आज भी है जहां पर भक्त प्रह्लाद को बांधा गया था और जहां से साक्षात नृसिंह देवता प्रकट हुए थे। कुछ लोग इस खंबे को भक्त प्रह्लाद के बंधे होने की मान्यता को मानते हैं जबकि कुछ यह मानते हैं कि इसी से नृसिंह देवता प्रकट हुए थे। 



प्रह्लाद की जन्मभूमि मुल्तान का इतिहास :
यह कभी प्रह्लाद की राजधानी था और उन्होंने ही यहां भगवान विष्णु का भव्य मंदिर बनवाया। मुल्तान वास्तव में संस्कृत के शब्द मूलस्थान का परिवर्तित रूप है, वह सामरिक स्थान जो दक्षिण एशिया व इरान की सीमा के चलते सैन्य दृष्टि से संवेदनशील था।

यहां माली वंश के लोगों ने भी शासन किया और अलक्षेंद्र (सिकंदर) को यहीं पर भारतीय राजाओं के साथ युद्ध के दौरान छाती में तीर लगा जो उसकी मृत्यु का कारण बना। समय-समय पर इस नगरी पर अनेक हमलावरों ने आक्रमण किए। इस्लामिक लुटेरों ने प्रह्लाद के मंदिर को भी कई बार क्षतिग्रस्त किया और इसके पास भी हजरत बहाउद्दीन जकारिया का मकबरा बना दिया गया। इतिहासकार डॉ. ए.एन. खान के हिसाब से जब ये इलाका दोबारा सिक्खों के अधिकार में आया तो सिख शासकों ने 1810 के दशक में फिर से मंदिर बनवाया।
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मगर जब एलेग्जेंडर बर्निस इस इलाके में 1831 में आये तो उन्होंने वर्णन किया कि ये मंदिर फिर से टूटे फूटे हाल में है और इसकी छत नहीं है। कुछ साल बाद जब 1849 में अंग्रेजों ने मूल राज पर आक्रमण किया तो ब्रिटिश गोला किले के बारूद के भण्डार पर जा गिरा और पूरा किला बुरी तरह नष्ट हो गया था। बहाउद्दीन जकारिया और उसके बेटों के मकबरे और मंदिर के अलावा लगभग सब जल गया था।

एलेग्जेंडर कनिंघम ने 1853 में इस मंदिर के बारे में लिखा कि ये एक ईंटों के चबूतरे पर काफी नक्काशीदार लकड़ी के खम्भों वाला मंदिर था। इसके बाद महंत बावलराम दास ने जनता से जुटाए 11,000 रुपये से इसे 1861 में फिर से बनवाया। उसके बाद 1872 में प्रह्लादपुरी के महंत ने ठाकुर फतेह चंद टकसालिया और मुल्तान के अन्य हिन्दुओं की मदद से फिर से बनवाया।

सन 1881 में इसके गुम्बद और बगल के मस्जिद के गुम्बद की उंचाई को लेकर हिन्दुओं-मुसलमानों में विवाद हुआ जिसके बाद दंगे भड़क उठे। मुस्लिम बाहुल्य इलाकों में दंगे रोकने के लिए ब्रिटिश सरकार ने कुछ नहीं किया। इस तरह इलाके के 22 मंदिर उस दंगे की भेंट चढ़ गए। मगर मुल्तान के हिन्दुओं ने ये मंदिर फिर से बनवा दिया। ऐसा ही 1947 तक चलता रहा जब इस्लाम के नाम पर बंटवारे में पाकिस्तान हथियाए जाने के बाद ज्यादातर हिन्दुओं को वहां से भागना पड़ा।
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बाबा नारायण दास बत्रा वहां से आते समय वहां के भगवान नरसिंह की प्रतिमा ले आये। अब वो प्रतिमा हरिद्वार में है। टूटी फूटी, जीर्णावस्था में मंदिर वहां बचा है। सन 1992 के दंगे में ये मंदिर पूरी तरह तोड़ दिया गया। अब वहां मंदिर का सिर्फ अवशेष बचा है। सन 2006 में बहाउद्दीन जकारिया के उर्स के मौके पर सरकार ने इस मंदिर के अवशेष में वजू की जगह बनाने की इजाजत दे दी।
9:55 am

अंगूठी का भूत

मार्च का महीना था। सर्दियां खत्म भी नहीं हुई थीं और गर्मियां शुरू भी नहीं हुई थीं। दिल्ली के लिए मार्च का महीना सुखद होता है। रात हो चुकी थी। नेहा खिड़की से बाहर झांक रही थी। बाहर गली में नीम के कई पेड़ लगे थे। बसंत बेशक आ चुका था लेकिन नीम के पेड़ थोड़ा लेट चल रही थे। हरे पत्ते रंग बदल कर पीले हो गए थे। हवा के साथ-साथ नीम अपने पुराने पत्ते छोड़कर नए दौर का स्वागत करने को तैयार हो रहा था। बाहर हल्की हवा चल रही थी। उसे अनिल के साथ बिताए पल याद आ रहे थे। सोच रही थी कि अनिल ने अपने को ना जाने किन बंधनों में बांध रखा था।

Anguthi ka bhoot


सोचते सोचते ही नेहा बिस्तर पर आ गिरी। काफी टहलने से वो थकी भी हुई थी। उसकी आंखें तुरंत बोझिल होने लगी। बाहर से कुत्तों के भौंकने की आवाजें आ रही थीं। गली में लगी स्ट्रीट लाइट अचानक जलने-बुझने लगी थी। हल्की हवा चल रही थी परदा हिल रहा था, खिड़की के दरवाजों के साथ पंखे से आवाजें आ रही थीं टक-टक टक-टक।



वक्त धीरे चल रहा था पर वक्त को पीछे छोड़ते हुए नेहा नींद में डूबती चली गई। इस नींद का इंतजार अंगूठी का भूत कर रहा था। नेहा के नींद में जाते ही भूत भी जाग गया। वो नेहा को एक अनोखी दुनिया में ले गया। वो डरा कर भगा नहीं रहा था। वो खींच रहा था अपनी दुनिया में। वो एक नकली दुनिया गढ़ रहा था और नेहा के पास इस दुनिया में खो जाने के अलावा कोई चारा नहीं था।

- - -
कॉलेज का पहला दिन।

नेहा कॉलेज में दाखिल हो रही थी। मन में कुछ खुशी तो कुछ घबराहट थी। स्कूल की दुनिया से निकल कर आई नेहा को सब कुछ हैरान कर रहा था। वो कभी दीवारों को देख रही थी तो कभी अजनबी चेहरों में किसी जान-पहचान वाले को खोज रही थी। गेट से दाखिल होते ही उसे लगा कि कॉलेज में उसे देखा जा रहा है। कुछ-कुछ इशारे भी लड़के आपस में कर रहे हैं। पास खड़ी गाड़ी से गुजरी तो उसने देखा कि उसने ब्लू जींस और सफेद टी शर्ट पहनी है। वो खूबसूरत लग रही थी। उसे अपने बदन कुछ ज्यादा भरा-भरा सा लगा। उसे अपने पर नाज हुआ। उसने एक सेकेंड रूककर शीशे में अपने बाल ठीक किए और आगे बढ़ गई।

इतने में चार लड़कों का एक ग्रुप उसके पास आया और पूछा “आर यू फ्रैशर?”

घबराई सी नेहा ने हां करते हुए गर्दन हिलाई

सीनियर लड़कों ने कहा पास के कमरे में इंटरेक्शन चल रहा है चलिए हमारे साथ।

नेहा मना नहीं कर पाई। पहले ही दिन सीनियर्स को नाराज करने का उसका कोई इरादा नहीं था।

सीनियर लड़के उसे कॉलेज में कोने के एक कमरे में ले गए। वहां पहले से कई सारे सीनियर स्टूडेंट मौजूद थे। अधिकतर लड़के थे लेकिन कुछ लड़कियां भी थीं। सभी के चेहरे पर शरारत भरी मुस्कुराहट थी।

व्हाइट इज योर नेम- एक कड़कड़ाती हुई आवाज आई

नेहा- नेहा ने डरते हुए जवाब दिया।

विच कोर्स- दूसरी आवाज आई

नेहा – बी ए

कई लोगों के हंसने की आवाज आई “अरे, ये तो बीए वाली है”। इतने में तीसरी आवाज आई “आज क्या दिखाने वाली हो?” कहते हुए सब हंस पड़े।

नेहा ने गर्दन उठाकर देखा उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि इस बात का क्या मतलब है?

इतने में एक और आवाज आई, “अरे, घबराओ नहीं, कुछ तो दिखाओ....”

नेहा की समझ में नहीं आ रहा था कि इस डबल मीनिंग बात का क्या जवाब दे। उसे लगा कि वो धरती में धंसती जा रही है।

“मतलब टैलेंट पूछ रहे हैं हम- क्या टैलेंट है तुम्हारा? वैसे कुछ-कुछ तो दिखाई दे रहा है” एक चुभती हुई आवाज ने पूछा। नेहा ने उस शख्स की तरफ देखा तो एक वाहियात सी हंसी नजर आई। उसने रैगिंग के बारे में सुना था, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि कुछ इस तरह रैगिंग की शुरूआत होगी।

एक और आवाज आई- “ये तो बच्ची दाखिला लेने आई है।“ कहते हुए फिर ठहाके गूंज गए।

एक लड़का आगे आया और कहा “नेहा, उछल कर तो दिखाओ।“

नेहा के आंसू छलकने ही वाले थे। उसे इस तरह का बर्ताव बिल्कुल पसंद नहीं आ रहा था। लेकिन कमरे में मौजूद लड़के और लड़कियां इस भद्दे मजाक का मजा ले रहे थे। अक्सर दर्शक बन कर हम उन चीजों का मजा लेते हैं जिन्हें अपने साथ एक मिनट भी बर्दाश्त ना करें।

वो लड़का फिर बोला “उछलना भी नहीं आता, देखो, ऐसे। हाथ उपर करो और ऐसे”... करते वो उछलने लगा। उसने फिर नेहा की तरफ देखा और कहा ”स्कूल में पीटी नहीं की क्या?” क्लास में ठहाकों का जोर और बढ़ लगा।

“छोड़ो, जरा कैटवॉक करके दिखा दो” और अजीब सी चाल में लड़के ने चल कर दिखाया। नेहा के कदम ठिठक गए थे वो जोर से चिल्लाना चाहती थी। वो कुछ को थप्पड़ भी मारना चाहती थी। पर नेहा हिम्मत जुटा कर क्लास से बाहर निकल ली। इतने में चाल बताने वाला लड़का दौड़ कर आया और गेट के बाहर नेहा का हाथ पकड लिया।

जितने तेजी से वो लड़के ने दौड़ कर हाथ पकड़ा था उतनी तेजी से ही वो वापस कमरे में आकर गिरा। इससे पहले कोई समझ पाता एक पतला सा शख्स कमरे में दाखिल हुआ।

“हिम्मत कैसे हुई लड़की को छेड़ने की” वो चिल्लाया।

“कॉलेज को गली-मोहल्ला समझ कर रखा है। कौन-कौन रैगिंग कर रहा था सब नाम बताओ। सबको निकलवाता हूं बाहर।“ कमरे में सन्नाटा छा गया। सबकी गर्दन नीचे हो गई। एक मिनट पहले जिस कमरे में हंसी-ठहाके गूंज रहे थे अब मरघट जैसी शांति थी। नेहा लड़के के पीछे खड़े हो कर सब देख रही थी। नम आंखों के साथ अब उसके चेहरे पर मुस्कान थी। इस लड़के ने आकर उसकी इज्जत रख ली थी या कहें तो नेहा की बेइज्जती होने से बचा ली थी। सब एक-एक कर कमरे से निकलने लगे।

कोई तो था जिसका इतना रूतबा था कॉलेज में कि ऐसे टेढ़े लड़के भी बात सुन रहे थे। कौन है टीचर है स्टूडेंट हैं? नेहा के मन में सवाल कौंध रहे थे। उनसे गौर से लड़के को देखा। हल्के घुंघराले बाल, चेहरे पर मासूमियत, पैरों में स्पोर्ट्स शूज, जींस के साथ शर्ट पहने हुआ था। रूप-रंग और कपड़ों से टीचर तो नहीं लग रहा था। इतने में एक लड़का जाते हुए बोला “सॉरी भैया”।

नेहा की समझ आ गया कि ये कॉलेज का सीनियर लड़का है। लड़के ने घूमा और नेहा से पूछा – हाई आई एम जय।

जय ने तुरंत नेहा की तरफ हाथ आगे किया. नेहा ने बिना झिझक के हाथ मिलाते हुए नाम बता- “नेहा”।

“उम्मीद है इन लोगों ने ज्यादा तंग नहीं किया होगा। तमाम कोशिशों के बाद भी ये लोग मानते नहीं। जिस लड़के ने हाथ पकड़ा आज तो उसकी तो खैर नहीं।“ - जय ने कहा।

नेहा बहुत कुछ कहना चाहती थी लेकिन उसकी जुबान से सिर्फ थैंक्यू निकला।

“सॉरी, कॉलेज के बाकी स्टूडेंट्स की तरफ से। हम ऐसे वेलकम नहीं करते पर कुछ लोगों की वजह से बाकी बदनाम होते हैं।“ वेलकम कहते हुए एक बार फिर जय ने नेहा का हाथ अपने हाथों में लिया।

नेहा के लिए ये एहसास बहुत खास था। शायद इतने प्यार और सम्मान से तो तो अनिल ने भी उसे कभी हाथ नहीं लगाया।

अनिल का नाम दिमाग में आते ही नेहा को बहुत जोर का झटका लगा। वो बिस्तर पर लेटी थी। उसकी आंख खुल गई थी। आसपास अब भी कुत्ते भौंक रहे थे, परदे हिल रहे थे। पंखा अब भी कट-कट कर रहा था। लाइट उसी तरह जल-बुझ हो रही थी। उसे समझ ही नहीं आ रहा था कि हुआ क्या, इस सपने का मतलब क्या है? कॉलेज के इतने साल बाद उसे ये सपना क्यों आया? वो किस कॉलेज में पहुंची थी? जय कौन था? जय के हाथों के स्पर्श ने उसे भरोसा और सम्मान क्यों महसूस कराया? नेहा ने अपने हाथों को छूकर देखा तो अंगूठी पर से उसका हाथ गुजरा, अंगूठी की गर्माहट उसे महसूस हुई, ठीक वैसी जैसी उसने जय के हथेलियों में महसूस की थी।

नेहा शांत थी पर हैरान थी। उसे डर नहीं लग रहा था, पर वो सपने में लौटना चाहती थी। वो जानना चाहती थी कि आगे क्या हुआ। क्या जय फिर सपने में आएगा? वो जय से बातें करना चाहती थी। एक गिलास पानी पीकर नेहा फिर से लेट गई। रात अभी बाकी थी और अंगूठी का भूत उसे फिर से अपनी दुनिया में खींचने के लिए बेकरार था।


लेखक- गंदगी के महारथी- व्यंग्य संग्रह

04 मार्च 2019

9:48 am

दुनिया कि सबसे शक्तिशाली 10 मिसाइलें || world top ten missile


       हम 21वीं शताब्दी में परमाणु बम और मिसाइलों के युग में रह रहे हैं. दुनिया में सबसे शक्तिशाली मिसाइलों में से कुछ मिसाइल रूस, चीन अमरीका और भारत के पास हैं. इसमें कोई संदेह नहीं है कि इंटर-कॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइल प्रौद्योगिकी का भविष्य है.
      द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और सोवियत संघ हथियार बनाने के दौड़ में बड़ी संख्या में रक्षा सामग्री का उत्पादन कर रहे थे. दुनिया में शान्ति बनाए रखने के लिए राष्ट्रों ने परमाणु बम और परमाणु हथियारों को लेकर विभिन्न संधियों पर हस्ताक्षर किए हैं.
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       लेकिन, अभी भी बड़ी संख्या में हर साल मिसाइल ओर परमाणु बम का उत्पादन होता है. आइये इस लेख के माध्यम से अध्ययन करते हैं कि दुनिया की 7 सबसे खतरनाक मिसाइल कौन सी हैं, इनकी मारक क्षमता क्या है और इनके निर्माण में किन तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है इत्यादि.

ब्रह्मोस

     दुनिया की सबसे तेज सुपरसोनिक मिसाइल ब्रह्मोस मिसाइल ने भारतीय वायु सेना की ताकत काफी बढ़ा दी है। इसे डीआरडीओ ने रूस के साथ ब्रह्मोस एयरोस्पेस नाम के जॉइंट वेंचर के माध्यम से विकसित किया है। ब्रह्मोस को धरती, समुद्र या हवा कहीं से भी लॉन्च किया जा सकता है। इस मिसाइल की रफ्तार ध्वनि की गति से भी तीन गुना ज्यादा है। हाल में इसकी रेंज 290 किमी. से बढ़ाकर 450 किमी. की गई थी। यह मिसाइल कम ऊंचाई पर उड़ान भरती है और रडार की पकड़ में नहीं आती। 
         ब्रह्मोस का 12 जून, 2001 को सफल लॉन्च किया गया था। इसका नाम भारत की नदी (ब्रह्मपुत्र) और रूस की नदी (मस्कवा) को मिलाकर रखा गया है। दुनिया में किसी भी एयर फोर्स के लिये यह मिसाइल गेम चेंजर साबित हो सकती है। 22 नवंबर, 2017 को भारत ने लड़ाकू विमान सुखोई से इस विमान को सफलतापूर्वक दागा। दागी जाने वाली इस मिसाइल का वजन 2.5 टन था। यह सुखोई विमान पर तैनात किया जाने वाला अब तक का सबसे भारी हथियार था। 


निर्भय मिसाइल

       निर्भय मिसाइल 300 किलोग्राम परमाणु आयुध ले जाने में सक्षम है और 1000 किलोमीटर के दायरे में स्थित ठिकानों को निशाना बना सकती है। इसके अलावा यह काफी नीची ऊंचाई पर भी उड़ सकती है। निर्भय क्रूज मिसाइल हर मौसम में काम कर सकती है। मिसाइल के सटीक निशाने के लिए इसमें बेहद उच्च स्तरीय नेवीगेशन सिस्टम लगा है. 


LGM-30 Minuteman, अमेरिका

        LGM-30 Minuteman एक अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईसीबीएम) है। 13,000 किलोमीटर की दूरी तक मार करने वाले यह मिसाइल एक साथ 3 परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम है। यह एक साथ ही तीन अलग-अलग ठिकानों को तबाह कर सकता है। अमेरिकी सेना ने इसे ट्राइडेंट मिसाइल सिस्टम से लैस करके दुनिया की सबसे मारक मिसाइल बना दिया है। फिलहाल ये अमेरिकी सेना में शामिल इकलौती अंतरमहाद्वीपीय मिसाइल है।


R-36, रूस

         यह दुनिया की सबसे लंबी दूरी तक मारे करने वाली मिसाइल है। 8 किलोमीटर प्रति सेकेंड की रफ्तार से चलने वाली यह मिसाइल 16 हजार किलोमीटर तक लक्ष्य को भेद सकती है। परमाणु हथियारों के अलावा दुनिया की सबसे ज्यादा विस्फोटक अपने साथ ले जाने में सक्षम मिसाइल भी है। यह अपने साथ 550 किलोग्राम वजनी परमाणु बम ले जाने में सक्षम है। ये एक साथ 10 से ज्यादा ठिकानों पर निशाना साधने में रक्षम है। इसे शुरुआत में अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए बनाया गया था, लेकिन बाद में मारक मिसाइल में तब्दील कर दिया गया। 


DF-41, चीन

           इस मिसाइल की मारक क्षमता 14 हजार किलोमीटर है। 8.16 किलोमीटर प्रति सेकेंड की स्पीड से चलने वाली यह मिसाइल दुनिया की दूसरी सबसे लंब दूरी तय कर मार करने वाली मिसाइल है जिसें चीन ने बनाया है। चीन इसी मिसाइल के दम पर अमेरिका, जापान और भारत समेत पूरी दुनिया को आंख दिखाता है।


M51, फ्रांस 

            फ्रांस द्वारा निर्मित यह M51 एसएलबीएम यानि बैलिस्टिक मिसाइल है। यह ईएडीएस एस्ट्रियम अंतरिक्ष परिवहन द्वारा डिजाइन किया गया था और फ्रांसीसी नौसेना द्वारा प्रयोग किया जाता है। यह मिसाइल अपने साथ 8 से 10 थर्मोन्यूक्लियर हथियार ले जाने में सक्षम है और इसे पानी के अंदर पनडुब्बी से भी दागा जा सकता है। 


UGM-133 Trident ll, अमेरिका

             अमेरिकी हथियार निर्माता कंपनी लॉकहीड मार्टिन की ओर से विकसित की गईं ये बैलिस्टिक मिसाइल पानी से भी दागी जा सकती हैं। चीन की DF-41 से इतर ये मिसाइल पनडुब्बियों पर भी तैनात हैं, जिनकी जद में पूरी दुनिया है। इस मिसाइल का इस्तेमाल सिर्फ अमेरिका और ब्रिटेन की रॉयल नेवी करती है। परमाणु हथियारों से लैस ये मिसाइल एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने में सक्षम है। 1983 में विकसित इस मिसाइल को अमेरिकी और ब्रिटिश सेना 1990 से इस्तेमाल कर रहे हैं, जिनकी मारक क्षमता 7840 किलोमीटर तक है।


Jericho lll, इजरायल

              इजरायल की हथियार प्रणाली बेहद गोपनिय होती है और जनता के बीच इनकी जानकारी बेहद कम है। Jericho lll इजरायल द्वारा निर्मित अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (आईएसबीएम) है। यह लगभग परमाणु हथियारों सहित 1000 किलो का विस्फोटक ले जा सकता है। इसकी रेंज 2000 किमी से लेकर 11,500 किलोमीटर तक होने का अनुमान लगाया गया है।


Tomahawk, अमेरिका

            इस मिसाइल का उपयोग अमेरिका ने अफगानिस्तान और इराक युद्ध में किया था। टॉमहॉक क्रूज मिसाइल मध्यम से लंबी दूरी तक मार करने की सबसे खतरनाक मिसाइल है। टॉम हॉक 1500 किलोमीटर की दूरी से अपना लक्ष्य साध कर हमला करती है। इस मिसाइलों को पकड़ पाना बेहद मुश्किल है, जो छोड़े जाने के महज कुछ ही देर में अपने लक्ष्य को तहस नहस कर देती हैं। टॉमहॉक ने सबसे पहले 1991 के खाड़ी युद्ध में अपना जौहर दिखाया था। 

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V-2 Rocket, जर्मनी

         वी -2 रॉकेट को आज के मिसाइल और रॉकेट टेक्नोलॉजी का अगुआ कहा जाता है। यह इंसानों द्वारा बनाया गया पहला रॉकेट था जो अंतरिक्ष में प्रवेश करने में सक्षम था। इसे नाजी शासन में द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान बनाया गया। जर्मनी ने इसका इस्तेमाल लंदन और एंटवर्प में बमबारी के लिए किया था। कहा जाता है कि 3000 वी-2 राकेट ने करीब 9000 लोगों को मारा था। इसके अलावा इसे बनाने के दौरान यातना शिविरों में मौजूद 12 हजार मजबूर मजदूरों की मौत हो गई। 

03 मार्च 2019

10:50 pm

दुनिया के TOP 10 फाइटर प्लेन || top 10 fighter plane


         दुनिया के कई देशों के पास एसे खतरनाक हथियार हैं , जो पल भर में दुश्मन का सफाया कर सकते हैं । अडवांस मिसाइलें , तोप , टैंक , मशीन गन अमेरिका , रूस , फ्रांस , चीन और भारत जैसे देशों को । शक्तिशाली राष्ट्र की सूची में खड़ा करती हैं । लेकिन अगर किसी मुल्क की ताकत मापनी हो , तो उसकी वायुसेना का दमखम जरूर देखा जाता है । आज हम आपको दुनिया के 10 सबसे ताकतवर फाइटर जेट्स के बारे में बता रहे हैं , जो दुश्मन के इलाके में अंदर तक घुसकर तबाही मचा सकते हैं ।
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मल्टीमीडिया डेस्क
           किसी भी दुश्मन की ताकत पता करनी हो या सेना को हमला करना हो। जमीनी हमला करना हो या समुद्र में दुश्मन के जहाज को नष्ट करना हो, सैनिकों को एक कोने से दूसरे कोने तक पहुंचाना हो या थलसेना की मदद के लिए जमीनी युद्ध के दौरान हवाई हमले करनी हो।इन सभी कामों के लिए सबसे ज्यादा जरूरत जिस चीज की होती है, वो लड़ाकू विमान होते हैं। ये फाइटर प्लेन पलक झपकते ही दुश्मन को नेस्तानाबूद कर देते हैं। इसलिए आज दुनिया में जिस किसी भी देश के पास सबसे ताकतवर वायुसेना है, वो सबसे शक्तिशाली है। तो आइए जानते हैं, दुनिया के वो टॉप 10 फाइटर प्लेन, जिनके नाम भर से ही दुश्मन कांप जाते हैं।

एफ 35-लाइटनिंग
       स्टील्थ टेक्नोलॉजी से लैस एफ 35-लाइटनिंग विमान मौजूदा समय का सबसे घातक फाइटर प्लेन है। इसकी तकनीक इसे पूरी दुनिया में आगे रखती है। इस फाइटर प्लेन को अमेरिका ने रैप्टर फाइटर प्लेन की अगली पीढ़ी के तौर पर विकसित किया है, जिसे वो दुनिया के शक्तिशाली देशों ऑस्ट्रेलिया, जापान, इजरायल, दक्षिण कोरिया को भी देगा, जिसके लिए समझौते भी हो चुके हैं। ये प्लेन एक बार उड़ान भरने पर दुनिया के किसी भी कोने में निर्बाध रूप से हमले करने में सक्षम है, जिसे रोकने की ताकत फिलहाल विकसित तक नहीं हो पाई है। ये फाइटर प्लेन अभी तक सिर्फ 150 की संख्या में ही तैयार हैं, जिसके दम पर अमेरिका ने पूरी दुनिया पर अभी से दबदबा बना लिया है। इसके तोड़ की खोज शुरू हो चुकी है। हां ये बात है कि अभी तक किसी को भी सफलता नहीं मिली है। इस पर तमाम आधुनिक हथियारों (परमाणु हथियारों समेत) की तैनाती की जा सकती है।
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टी-50: सुखोई पीएके-एफए
       भारत और रूस के संयुक्त प्रयास से सिर्फ भारत और रूसी सेना के लिए विकसित किए जा रहे ये फाइटर प्लेन पांचवी पीढ़ी का दुनिया का सबसे उन्नत फाइटर प्लेन होगा। ये सिंगल सीटर और डबल सीटरे दोनों ही श्रेणी में बनाए जा रहे हैं। अभी इस श्रेणी के सिर्फ 5 विमान ही तैयार हुए हैं, जिनकी लगातार ट्रायल जारी है। टी-50 के नाम से ही पश्चिमी देशों के पसीने छूटने लगे हैं, क्योंकि इसके आते ही भारत और रूस पूरी तरह से लड़ाकू विमानों के क्षेत्र में आत्मनिर्भर हो जाएंगे, जो किसी भी राडार की पकड़ में नहीं आते। स्टील्थ फाइटर प्लेन्स की रेस में रूस भी पहली बार व्यापक स्तर पर इस होड़ में शामिल हो चुका है। अभी तक रूस के पास भी एक्टिव स्टील्थ तकनीक से लैस कोई फाइटर प्लेन नहीं है, लेकिन इसके आने से रूस और भारत दोनों ही दुनिया में कहीं भी हमला करने और किसी भी हमले को रोकने में सक्षम हो जाएंगे। भारत और रूस के इस उपक्रम से पाकिस्तान, चीन और अमेरिका में खलबली मची हुई है। एक तरफ पश्चिमी देश और अमेरिका जहां रूस के परंपरागत प्रतिद्वंदी हैं, तो भारत के प्रति पाकिस्तान और चीन का नजरिया किसी से छिपा नहीं। ये फाइटर प्लेन भारत और रूस के वायुसेना के साथ ही नौसेना की जरूरतों को भी ध्यान में रखकर बनाया गया है।

चेंगदू जे-10
      चेंगदू जे-10 मौजूदा समय में चीनी सेना का अचूक हथियार है, जो पाकिस्तान के पास थंडर नाम से है। चेंगदू जे-10 किसी भी मौसम में किसी भी लक्ष्य पर तेजी से हमला करने में सक्षम है। चेंगदू जे-10 में लेजर गाइडेड बमों के साथ ही सेटेलाइट गाइडेड बम के उपयोग की भी क्षमता है, जो इसकी मारक क्षमता को बढ़ाते हैं। ये एक बार की उड़ान में कई ठिकानों पर बमबारी में सक्षम है। चीनी सेना चेंगदू-10 श्रेणी के 400 विमानों का इस्तेमाल कर रही है, जिसमें से वो एक स्कॉड्रवन पाकिस्तानी सेना को देने वाली है।

डसाल्ट रॉफेल
           डसाल्ट एविएशन की ओर से विकसित ये फाइटर प्लेन फ्रांस के अग्रणी स्ट्राइक टीम का मुख्य हिस्सा है। डसाल्ट रॉफेल हर नई तकनीक से लैस होने के साथ ही परमाणु हमले में भी सक्षम है। इस फाइटर प्लेन ने अफगानिस्तान, लीबिया, माली और इराक हमलों में अपना जौहर दिखाया है। इस फाइटर प्लेन में अपना खुद का रडार सिस्टम है, जो दुश्मन के हमनों को तुरंत पकड़ उन्हें जवाब देने की ताकत रखता है। इसे भारतीय सेना में भी तैनात किया जा रहा है। इसकी तीन श्रेणियां है, जो सिंगल सीटर (जमीनी हमले के लिए), डबल सीटर (जमीन से हमले के लिए) और राफेल एम (सिंगल सीटर) नौसेना के इस्तेमाल के लिए हैं।
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एफ-22 रैप्टर (लॉकहीड मॉर्टिन)
     लॉकहीड मॉर्टिन द्वारा विकसित दुनिया का सबसे खतरनाक फाइटर प्लेन है। रैप्टर किसी भी रडार की पकड़ में न आने वाला प्लेन है, जो बेहद कम समय में दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने पर सक्षम है। अमेरिका इस खास फाइटर प्लेन पर किस हद तक नाज करता है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि खास कानून बनाकर इसे किसी भी दूसरे देश की पहुंच से बाहर कर दिया गया है। इसे अमेरिका किसी भी देश को नहीं बेचेगा। ये फाइटर प्लेन लंबी दूरी तक, जमीन के पास और दूर रहकर किसी भी लक्ष्य को नष्ट कर सकता है, साथ ही दुश्मन के फाइटर प्लेन्स को भी। एफ-22 रैप्टर (लॉकहीड मॉर्टिन) को खरीदने में कई देशों ने दिलचस्पी दिखाई, लेकिन बेहद महंगे दाम और रोक की वजह से किसी को भी नहीं मिला। ये इतना महंगा है कि जापान के कुल सैन्य खर्च का 1 फीसद सिर्फ एफ-22 रैप्टर में ही लग जाएगा। हालांकि बाद में अमेरिकी कांग्रेस ने इसके उत्पादन पर रोक लगा दी, लेकिन अगले 30 सालों तक ये अपनी श्रेणी में अद्वितीय फाइटर प्लेन बना रहेगा। इसके उत्पादन पर रोक की वजह से ही इसे थोड़ निचले क्रम पर जगह मिली है।

सी हारियर
            ब्रिटिश सेना के लिए निर्मित सी हारियर अपनी श्रेणी में अद्दभुत क्षमता रखने वाला तीसरी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इस फाइटर प्लेन के दम पर ब्रिटेन ने फॉकलैंड युद्ध, दोनों खाड़ी युद्धों और बाल्कन तनाव के समय भी हमला किया। ये समुद्र से जमीन पर हमला करने में सक्षम है और पोत के माध्यम से दुनिया के किसी भी कोने में हमला कर सकती है। फॉकलैंड युद्ध में इन विमानों ने दुश्मनों के 20 लड़ाकू विमानों को मार गिराया। सी हारियर को भारतीय नौ-सेना आज भी इस्तेमाल कर रही है, तो ब्रिटिश रॉयल नेवी ने इसकी जगह दुनिया के सबसे तेज विमान लॉकहीड मॉर्टिन के लाइटनिंग II से बदला है। क्योंकि इस श्रेणी में लाइटनिंग II के अतिरिक्त कोई भी विमान मौजूद नहीं है।

यूरोफाइटर टाइफून (यूरोपीय यूनियन)
            यूरोफाइटर टाइफून को यूरोपीय यूनियन के देशों जर्मनी, इटली, ब्रिटेन और स्पेन ने संयुक्त रूप से बनाया है। यूरोफाइटर टाइफून किसी भी परिस्थिति में काम करने में सक्षम बहुउदेश्यीय फाइटर प्लेन है। इस फाइटर प्लेन ने 2011 में लीबिया हमले हमले के दौरान फ्रांस और इटली की ओर से कमान संभाली। पूरी दुनिया के करीब 22 देश यूरोफाइटर टाइफून का इस्तेमाल कर रहे हैं। इस फाइटर प्लेन में खुद का राडार भी है। जो किसी भी हमले से बचाव में काम आती है। यूरोफाइटर टाइफून अमेरिका के एफ-22 रैप्टर के आधे दाम का है, जबकि एफ-15, राफेल और रूस के मिग 27 से ऑपरेशन में बेहतर परिणाम दे चुका है।

मैक्डोनेल डगलस एफ-15 स्ट्राइक ईगल
          मैक्डोनेल डगलस एफ-15 स्ट्राइक ईगल फाइटर प्लेन लंबे समय से अमेरिका समेत 4 देशों की वायुसेना का हिस्सा है। ये विमान पलक झपकते ही किसी भी लक्ष्य को तहस नहस कर सकता है। फाइटर प्लेनों में चौथी पीढ़ी के विमानों का अगुवा ये फाइटर प्लेन दुनिया के तमाम ऑपरेशंस में अपनी भूमिका का जौहर दिखा चुका है। अमेरिकी एफ-15ई स्ट्राइक ईगल की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जब अमेरिका ने सद्दाम हुसैन की अगुवाई वाली इराकी सेना पर हमला किया तो इराकी वायुसेना ने एफ-15 विमानों का हवाला देकर उड़ने से ही इन्कार कर दिया और देखते ही देखते अमेरिका सेना ने पूरे इराक को तहस-नहस कर दिया। एफ-15 ने इराक, अफगानिस्तान और लीबिया युद्धों में व्यापक स्तर पर तबाही मचाई और जमीन पर आगे बढ़ रही थल सेना को कवर देते हुए दुश्मनों को रौंद डाला। इजरायल ने मैक्डोनेल डगलस एफ-15ई स्ट्राइक ईगल के दम पर गाजा में अंदर तक हमले किए, जिनसे बचने में ही दुश्मन ने पूरी ताकत झोंक डाली। लेकिन इजरायल का मुकाबला नहीं कर सके।

तेजस
          सिंगल और डबल सीटर लड़ाकू विमानों की पांचवीं पीढ़ी के विमानों में भारत द्वारा विकसित और भारत में ही निर्मित तेजस पूरी तरह से दुनिया के सर्वश्रेष्ठ लड़ाकू विमानों में शामिल हो चुका है। स्टील्थ तकनीक से लैस ये विमान भारत की हर जरूरत को पूरा करेगा, जो भारत की वायुसेना और जलसेना दोनों की ही उपयोग के लिए है। ये हल्का विमान है और बेहद कम समय में ही दुश्मन पर हमला करने में सक्षम है। तेजस की चकाचौंध से अभी से पूरी दुनिया थर्रा रही है। तेजस को भारतीय सेना में शामिल किया जा चुका है और इसी साल में ही पूरी स्कॉड्रवन की तैनाती हो जाएगी। भारतीय वायुसेना पूरी तरह से सिर्फ तेजस के ही 3 स्कॉड्रवन बनाना चाहती है, जो दुनिया के किसी भी लक्ष्य को वेधने में सक्षम है। तेजस कम उंचाई में उड़ान भरकर महज 15 मिनट में पाकिस्तान के किसी भी शहर को तहस नहस कर सकता है। इसपर परमाणु हथियारों की तैनाती भी की जाएगी। तेजस की सबसे बड़ी खूबी उसका किसी भी मौसम और किसी भी समय उड़ान भरकर हमला करने की है, जिससे भारत पड़ोसी देशों पर किसी भी युद्ध के शुरुआती चरण में भी बढ़त बना लेगा। इसे किसी भी मिसाइल से नहीं गिराया जा सकेगा।
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ग्रिपेन
        स्वीडन का लड़ाकू विमान ग्रिपेन मौजूदा समय के सबसे बेहतरीन लड़ाकू विमानों में से एक है। ये अनेरिका के एफए-18 सुपर हॉरनेट, और फ्रांसीसी रॉफेल विमानों से भी बेहतर है। ये हर परिस्थिति में सटीक तरह से हमले करने में सक्षम है। ब्राजील ने इसकी सटीकता को देखते हुए रॉफेल और अमेरिकी एफए-18 पर तरजीह दी। ये विमान एक तरफ तो दुनिया में सबसे तेज (मैक-2 स्पीड-सुपरसोनिक) से हमला करती है, तो बेहद छोटे (25 मीटर) की पट्टी पर भी लैंड करने में सक्षम है। स्वीडन के इस विमान की सबसे बड़ी खूबी इसके रखरखाव का सबसे सस्ता होना है। स्वतंत्र विशेषज्ञों के अनुसार, स्वीडिश लड़ाकू विमान ग्रिपेन को एक घंटे की उड़ान के बाद 6 से 10 तकनीशियन केवल आधे घंटे में ही नई उड़ान के लिए तैयार कर सकते हैं। इन मानकों की दृष्टि से लड़ाकू विमान ग्रिपेन अपने यूरोपीय प्रतिद्वंद्वियों से कहीं आगे है। उदाहरण के लिए, फ्रांसीसी विमान राफेल को एक घंटे की उड़ान के बाद नई उड़ान के लिए तैयार करने हेतु 15 तकनीशियनों को एकसाथ काम करना पड़ता है। अमरीकी विमान एफ-35 लाइटेनिंग-2 को तैयार करने के लिए 30 से 35 तकनीशियनों की आवश्यकता होती है। यही नहीं, ये सबसे सस्ते उड़ानों के लिहाज से भी बेहतर है। ग्रिपेनट के एक घंटे की उड़ान भरने के लिए 4700 डॉलर, जबकि राफेल की उड़ान के लिए 15 हज़ार डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। मतलब राफेल की उड़ान ग्रिपेन की उड़ान से तीन गुना महंगी पड़ती है।

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