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19 फ़रवरी 2019

8:51 pm

सोमनाथ मन्दिर भारत के गुजरात राज्य का एक नगर

सोमनाथ मन्दिर   भारत के पश्चिमी छोर पर गुजरात राज्य में स्थित, अत्यन्त प्राचीन व ऐतिहासिक सूर्य मन्दिर है। यह भारतीय इतिहास तथा हिन्दुओं के चुनिन्दा और महत्वपूर्ण मन्दिरों में से एक है। इसे आज भी भारत के १२ ज्योतिर्लिंगों में सर्वप्रथम ज्योतिर्लिंग के रूप में माना व जाना जाता है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मन्दिर के बारे में कहा जाता है कि इसका निर्माण स्वयं चन्द्रदेव ने किया था, जिसका उल्लेख ऋग्वेद में स्पष्ट है।
सोमनाथ मन्दिर

      यह मन्दिर हिंदू धर्म के उत्थान-पतन के इतिहास का प्रतीक रहा है। अत्यंत वैभवशाली होने के कारण इतिहास में कई बार यह मंदिर तोड़ा तथा पुनर्निर्मित किया गया। वर्तमान भवन के पुनर्निर्माण का आरंभ भारत की स्वतंत्रता के पश्चात् लौहपुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल ने करवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया। सोमनाथ मंदिर विश्व प्रसिद्ध धार्मिक व पर्यटन स्थल है। मंदिर प्रांगण में रात साढ़े सात से साढ़े आठ बजे तक एक घंटे का साउंड एंड लाइट शो चलता है, जिसमें सोमनाथ मंदिर के इतिहास का बड़ा ही सुंदर सचित्र वर्णन किया जाता है। लोककथाओं के अनुसार यहीं श्रीकृष्ण ने देहत्याग किया था। इस कारण इस क्षेत्र का और भी महत्व बढ़ गया।
         सोमनाथजी के मंदिर की व्यवस्था और संचालन का कार्य सोमनाथ ट्रस्ट के अधीन है। सरकार ने ट्रस्ट को जमीन, बाग-बगीचे देकर आय का प्रबन्ध किया है। यह तीर्थ पितृगणों के श्राद्ध, नारायण बलि आदि कर्मो के लिए भी प्रसिद्ध है। चैत्र, भाद्रपद, कार्तिक माह में यहां श्राद्ध करने का विशेष महत्व बताया गया है। इन तीन महीनों में यहां श्रद्धालुओं की बडी भीड़ लगती है। इसके अलावा यहां तीन नदियों हिरण, कपिला और सरस्वती का महासंगम होता है। इस त्रिवेणी स्नान का विशेष महत्व है।

प्राचीन हिन्दू ग्रंथों के अनुसार में बताये कथानक के अनुसार सोम अर्थात् चन्द्र ने, दक्षप्रजापति राजा की २७ कन्याओं से विवाह किया था। लेकिन उनमें से रोहिणी नामक अपनी पत्नी को अधिक प्यार व सम्मान दिया कर होते हुए अन्याय को देखकर क्रोध में आकर दक्ष ने चंद्रदेव को शाप दे दिया कि अब से हर दिन तुम्हारा तेज (काँति, चमक) क्षीण होता रहेगा। फलस्वरूप हर दूसरे दिन चंद्र का तेज घटने लगा। शाप से विचलित और दु:खी सोम ने भगवान शिव की आराधना शुरू कर दी। अंततः शिव प्रसन्न हुए और सोम-चंद्र के श्राप का निवारण किया। सोम के कष्ट को दूर करने वाले प्रभु शिव का स्थापन यहाँ करवाकर उनका नामकरण हुआ "सोमनाथ"।
सोमनाथ शिवजी की मूर्ति

     जगह पर द्वितीय बार मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक राजाओं ने किया। आठवीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी।गुर्जर प्रतिहार राजा नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका तीसरी बार पुनर्निर्माण किया। इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन १०२४ में कुछ ५,००० साथियों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। ५०,००० लोग मंदिर के अंदर हाथ जोडकर पूजा अर्चना कर रहे थे, प्रायः सभी कत्ल कर दिये गये।
             इसके बाद गुजरात के राजा भीम और मालवा के राजा भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया। सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मन्त्री सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।
          १९४८ में प्रभासतीर्थ, 'प्रभास पाटण' के नाम से जाना जाता था। इसी नाम से इसकी तहसील और नगर पालिका थी। यह जूनागढ़ रियासत का मुख्य नगर था। लेकिन १९४८ के बाद इसकी तहसील, नगर पालिका और तहसील कचहरी का वेरावल में विलय हो गया। मंदिर का बार-बार खंडन और जीर्णोद्धार होता रहा पर शिवलिंग यथावत रहा। लेकिन सन १०२६ में महमूद गजनी ने जो शिवलिंग खंडित किया, वह यही आदि शिवलिंग था। इसके बाद प्रतिष्ठित किए गए शिवलिंग को १३०० में अलाउद्दीन की सेना ने खंडित किया। इसके बाद कई बार मंदिर और शिवलिंग को खंडित किया गया। बताया जाता है आगरा के किले में रखे देवद्वार सोमनाथ मंदिर के हैं। महमूद गजनी सन १०२६ में लूटपाट के दौरान इन द्वारों को अपने साथ ले गया था।
        सोमनाथ मंदिर के मूल मंदिर स्थल पर मंदिर ट्रस्ट द्वारा निर्मित नवीन मंदिर स्थापित है। राजा कुमार पाल द्वारा इसी स्थान पर अन्तिम मंदिर बनवाया गया था। सौराष्ट्र के मुख्यमन्त्री उच्छंगराय नवलशंकर ढेबर ने १९ अप्रैल १९४० को यहां उत्खनन कराया था।
        इसके बाद भारत सरकार के पुरातत्व विभाग ने उत्खनन द्वारा प्राप्त ब्रह्मशिला पर शिव का ज्योतिर्लिग स्थापित किया है। सौराष्ट्र के पूर्व राजा दिग्विजय सिंह ने ८ मई १९५० को मंदिर की आधारशिला रखी तथा ११ मई १९५१ को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ॰ राजेंद्र प्रसाद ने मंदिर में ज्योतिर्लिग स्थापित किया। नवीन सोमनाथ मंदिर १९६२ में पूर्ण निर्मित हो गया। १९७० में जामनगर की राजमाता ने अपने पति की स्मृति में उनके नाम से 'दिग्विजय द्वार' बनवाया। इस द्वार के पास राजमार्ग है और पूर्व गृहमन्त्री सरदार बल्लभ भाई पटेल की प्रतिमा है। सोमनाथ मंदिर निर्माण में पटेल का बड़ा योगदान रहा।
बाणस्तम्भ


            मंदिर के दक्षिण में समुद्र के किनारे एक स्तंभ है। उसके ऊपर एक तीर रखकर संकेत किया गया है कि सोमनाथ मंदिर और दक्षिण ध्रुव के बीच में पृथ्वी का कोई भूभाग नहीं है  इस स्तम्भ को 'बाणस्तम्भ' कहते हैं। मंदिर के पृष्ठ भाग में स्थित प्राचीन मंदिर के विषय में मान्यता है कि यह पार्वती जी का मंदिर है।

              मन्दिर संख्या १ के प्रांगण में हनुमानजी का मंदिर, पर्दी विनायक, नवदुर्गा खोडीयार, महारानी अहिल्याबाई होल्कर द्वारा स्थापित सोमनाथ ज्योतिर्लिग, अहिल्येश्वर, अन्नपूर्णा, गणपति और काशी विश्वनाथ के मंदिर हैं। अघोरेश्वर मंदिर नं. ६ के समीप भैरवेश्वर मंदिर, महाकाली मंदिर, दुखहरण जी की जल समाधि स्थित है। पंचमुखी महादेव मंदिर कुमार वाडा में, विलेश्वर मंदिर नं. १२ के नजदीक और नं. १५ के समीप राममंदिर स्थित है। नागरों के इष्टदेव हाटकेश्वर मंदिर, देवी हिंगलाज का मंदिर, कालिका मंदिर, बालाजी मंदिर, नरसिंह मंदिर, नागनाथ मंदिर समेत कुल ४२ मंदिर नगर के लगभग दस किलो मीटर क्षेत्र में स्थापित हैं।

वेरावल प्रभास क्षेत्र के मध्य में समुद्र के किनारे मंदिर बने हुए हैं 
 शशिभूषण मंदिर, भीड़भंजन गणपति, बाणेश्वर, चंद्रेश्वर-रत्नेश्वर, कपिलेश्वर, रोटलेश्वर, भालुका तीर्थ है। भालकेश्वर, प्रागटेश्वर, पद्म कुंड, पांडव कूप, द्वारिकानाथ मंदिर, बालाजी मंदिर, लक्ष्मीनारायण मंदिर, रूदे्रश्वर मंदिर, सूर्य मंदिर, हिंगलाज गुफा, गीता मंदिर, बल्लभाचार्य महाप्रभु की ६५वीं बैठक के अलावा कई अन्य प्रमुख मंदिर है।
प्रभास खंड में विवरण है कि सोमनाथ मंदिर के समयकाल में अन्य देव मंदिर भी थे।
इनमें शिवजी के १३५, विष्णु भगवान के ५, देवी के २५, सूर्यदेव के १६, गणेशजी के ५, नाग मंदिर १, क्षेत्रपाल मंदिर १, कुंड १९ और नदियां ९ बताई जाती हैं। एक शिलालेख में विवरण है कि महमूद के हमले के बाद इक्कीस मंदिरोंo का निर्माण किया गया। संभवत: इसके पश्चात भी अनेक मंदिर बने होंगे।
सोमनाथ से करीब दो सौ किलोमीटर दूरी पर प्रमुख तीर्थ श्रीकृष्ण की द्वारिका है। यहां भी प्रतिदिन द्वारिकाधीश के दर्शन के लिए देश-विदेश से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। यहां गोमती नदी है। इसके स्नान का विशेष महत्व बताया गया है। इस नदी का जल सूर्योदय पर बढ़ता जाता है और सूर्यास्त पर घटता जाता है, जो सुबह सूरज निकलने से पहले मात्र एक डेढ फीट ही रह जाता है।
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29 जनवरी 2019

4:34 am

श्री कृष्ण की कुलदेवी श्री हरसिद्धि भवानी का इतिहास

गुजरात में स्थित पोरबंदर के पास गांधवी गाँव में माँ हरसिद्धि का मंदिर स्थित है। इसका महत्व बहुत अलग है। ऐसा कहा जाता है कि माता हरसिद्धि माता को भगवान कृष्ण की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है। और माता हरसिद्धि, जो कोयला की पहाड़ी पर बैठी हैं, आज भी अपने चमत्कारों के कारण पूजनीय हैं। माँ हरसिद्धि को हर्षद माँ, सिकोतर और वहाणवटी माँ के नामसे पुजा जाता है|

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पढ़िए कोयला पहाड पर बिराजमान माँ हरिसिद्धी की कहानी

कोएला पहाड़ पर बिराजमान हर्षद माँ भगवान श्री कृष्ण की कुलदेवी हैं। और उनका इतिहास कुछ ऐसा है। यह लोकवायका है कि बेट द्वारिका में शंखासुर नाम का एक राक्षस था। प्रतिदिन राक्षस त्रास बढ़ता गया। इस वजह से, बेट द्वारिका के लोगों ने राक्षस के विनाश के लिए भगवान कृष्ण से प्रार्थना की। तब भगवान कृष्ण ने राक्षस शंखासुर से युद्ध करने की सोची। लेकिन युद्ध के लिए, उनकी कुंलदेवी मां का आशीर्वाद लेने का फैसला किया, और भगवान कृष्ण ने कोयला डूंगर में आकर मां हर्षद की तपस्या की।

माता हर्षद भगवान कृष्ण की तपस्या से प्रसन्न हुईं।उन्होंने कहा, "आप सर्वशक्तिमान हैं, आप इस दुनिया के उद्धारकर्ता हैं, आप इस दुनिया के शरीर हैं। मेरी तपस्या का कारण क्या है? तब भगवान कृष्ण ने कहा कि मैं राक्षस शंखासूर से लड़ना चाहता हूं और आपका इसमें मुजे आशीर्वाद चाहिए। तब मां हर्षदे ने कहा, जब भी आप युद्ध पर जाएं, मुझे कोयला पहाड़ी पर ध्यान केंद्रित करके याद करना। मैं आपको युद्व में सहायता करूगी।

तब माताजी की कृपा से यादव परिवार के वंशज भगवान श्री कृष्ण ने शंखासुर का विनाश किया और शंखासुर के अत्याचार से बेट द्वारका के लोगों को मुक्त कराया। यादवों की कुलदेवी हरसिद्धी माँ का भगवान कृष्ण ने मंदिर का निर्माण किया। जो आज भी कोयला पहाड़ पर स्थापित है। कोयला पहाड़ में समुद्र के बीच में 400 सीढ़ियाँ हैं, जहाँ यह शक्ति विराजमान है। आज भी उनके चरणों में कदम रखते ही हजारों भक्त सुख महसूस करते हैं। उसी समय, जब आप सीढ़ियों पर चढ़ते हैं, तो आप प्रकृति की सुंदरता देखेंगे, समुद्र की लहरों की आवाज़ महसूस की जाएगी, और आप हवा के संबंध में प्रकृति का आनंद ले पाएंगे।

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कोयला पहाड़ियों के किनारे पर बैठी माँ हरसिद्धी का इतिहास


पहले के दिनों में, व्यापार केवल समुद्र के माध्यम से किया जाता था, और जब भी व्यापारि अपने जहाज कोइला पहाड़ से गुजरते थे, तब सब व्यापारी माता हरसिद्धी को ध्यान करते और एक श्रीफल और ओढनी समुद्र भगवान को अर्पित करते थे।

एक बार जगदुषा नाम का एक व्यापारी अपने सात जहाजों को लेकर इस समुद्र से गुजरता है, जगदुषा के सात जहाज हीरे के आभूषणों से भरे हुए थे। जगदुसा स्वयं एक बनिया है इसलिए उसे माताजी में आस्था नही रखता है। इसलिए उन्होंने हँसते हुए माताजी को ओढनी और  श्रीफल नहीं चढ़ाया और तुरंत ही जगदुषा के सात जहाज डूबने लगे; जगदुष ने देवी के क्रोध को समझा और कहा, 'हे देवी! मेरे सात जहाजों को डूबने से बचालो, उसे बचा लो। मैं तुरंत आपके दर्शन के लिए कोयला पहाड पर आऊगा और ओढनी और श्रीफल चढ़ाऊगा। "

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जगदुसा इतना बोलते है की तुरन्त ही एक चमत्कार होता है जहाँ सात जहाज समुद्र में अपने आप समुद्र में तैरते हैं, और फिर जगदुषा कोयला डूंगर के पास आता है और माँ हरीसिद्धी पर विश्वास करता है और अपनी कुलदेवी बनाता है। फिर उसने माताजी को बिनती करकेकहा माँ आपपहाड से नीचे मंदिरमें आजाए जिससे आपके भक्तो को पहाड चढने में परेशानी  न हों। कोयला पहाड़ी की चोटी के तल में मैं तुम्हें एक मंदिर बनवाऊंगा। जगदुषा ने तलहटी में एक मंदिर बनाया। लेकिन माताजी नीचे नहीं आईं। हर्षद माँ  जगदुषा भक्ति सेप्रसनहोकर जगदुसा की परीक्षा करने की सोची और कहा, मुझे हर एक कदम पर जानवर की बलि दो तो में पहाड़ से नीचे आकर तल मंदिर में वास करूगी।

जगदुषा ने पहाड़ की सीडीयों हर कदम पर बकरी, बकरा, अन्य जानवरों की बली चढाते गए। अब सभी जानवरोकी कुर्बानियां पूरी हो गई थी और आखिरी बचा सिर्फ चार कदम थे। लेकिन बहोत ढुढने पश्चात भी कोई जानवर नही मिला, तो माँ कहेती हैं, 'जगदुसा, मेरी बली अधूरी रही है।इसलिए में वापस पहाड पर चली जाती हूँ । जागदुसा माता जी को रोकते हुए कहा  मैं आपको अपना बलिदान दे दूंगा। ”उनके पुत्र और पत्नी सुना कि उनके पुत्र और उनकी  पत्नि बली देते है। चार कदमों में जगदुषा ओर परिवार का बलिदान माताजी  देते है। कोयला पहाड़ी की तलहटी में नीचे उतरती हैं और पहाड के नीचले मंदिर में बिराजमान होते है।

जगदुषा की पूजा से माताजी प्रसन हुए। और सभी कुर्बानियां फिरसे जीवित कर दिया। और वे जगदुषा के परिवार की कुलदेवी के रूप पूजते हैं और जगदुषा के कुल की रक्षा के लिए जगदुषा से वादा करते हैं। आज भी माता हर्षद कोयला पहाड़ी के किनारे पर मंदिर में बिराजमान हैं।

आज भी, हरसिद्धि को दल्लभ गोत्र के त्रिवेदी  के कुल की कुलदेवी के रूप में पूजा जाता है, और यह मंदिर वह है जहाँ सुबह आरती की जाती है और शाम की आरती उज्जैन में की जाती है।

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09 जनवरी 2019

1:36 pm

Most and popular places in Gujarat

Hello, friends today we are read about most and popular places of Gujarat.


Laxmi Vilas Palace, Vadodara

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Laxmi Vilas Palace is one of the most beautiful royal palaces in India. The royal palace is located on J N Marg in Baroda. The palace is considered as the largest private royal residence in the world. The Royal Palace is a perfect example of India’s royal families luxurious life and royal residences. It is one of the most beautiful tourist attractions in Gujarat and you should not miss an opportunity to explore it.

Aina Mahal, kuch
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Aina Mahal or “Hall of Mirrors” is the royal palace situated in the heart of the city i.e. near Hamirsar Lake in Bhuj city. The palace was built in the middle of the 18th century by Ramsinh Malam, a mast er craftsman. A key travel related information is given below.

Aina Mahal (Mirror Palace) is one of the oldest palaces in the state of Gujarat. It was built in the 18th century and located in Bhuj city. It was built by the Maharaja Rao Lakhpatiji in the year 1761. It was designed by Ram Singh Malam. The Palace was badly damaged in 2001 Gujarat Earthquake.



The Vijay Vilas Palace
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The Vijay Vilas Palace is one of the most beautiful royal palace in Gujarat, in located in Mandavi. It was built in 1929 by Rao Vijayraj ji. It is a well known place for Bollywood film shooting (Hindi film shooting). The Royal Palace has their own private beach which offers private tented accommodation (AC) on rent. The Vijay Vilas Palace has also a beautiful museum, a must to visit place for all tourists.
The Vijay Vilas Palace was also included in the list of Top 10 most beautiful royal palaces of Gujarat

Ranjit Vilas Palace, Wankaner

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The Ranjit Vilas Palace, Wankaner was constructed with style of Italian and European architecture. The palace has the finest architecture of marble and interior design. Ranjit Vilas Palace is situated on the hills of Wankaner town which is another beautiful location of the city. Ranjit vilas palace is famous for its beautiful architecture that is believed to be influenced by mughal, Victorian,gothic and dutch styles. The palace houses a watchtower located on a hill. The palace was designed and constructed by amar sinh ji to be a lookout over the wankaner town. The palace covers the area of 225acers, the palace houses a state guest house that is known as “chndra bhavan”.
It is the official residence of the Maharaja and his family members. It is also one of the popular destinations for Gujarati and Hindi film shooting. Generally, tourists are not allowed to visit the palace. Prior permission is required to enter in the palace.

The Naulakha Palace, Gondal
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The Naulakha Palace is also another popular destination for films shooting in the state of Gujarat. The Royal Family of Gondal has so many old vintage cars in their car collection. It is very difficult to see those vintage cars anywhere else. The Naulakha Palace is one of the best museums for various historical items. They charge a small amount of fee to visit the palace.

Pratap Vilas Palace, Jamnagar
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Jamnagar state was one of the most richest royal states in India. The King of Jamnagar is pronounced as the ‘Jam Sahib’ which is now a popular term in the state of Gujarat as a rich person. The people of Gujarat generally use this word ‘Jam Sahib’ to address any rich person.
The Jamnagar Royal Palace is the most beautiful palace in India. The Pratap Vilas Palace was built in the style of European architecture which shows its luxury living. 3 Domes of the palace were made from the special glass. Generally, common visitors are not allowed to visit the palace due to various reasons.

Nilambagh Palace, Bhavnagar
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The Nilambag Palace was used as the palace for the royal family of Bhavnagar in the past. Before some years ago, The Royal Family of Bhavnagar converted this royal palace into a Heritage Hotel for tourism.
The Nilambag Palace was built in 1859 by the Gohil dynasty in Bhavnagar state. It was used as the home of Royal Palace before many years ago. Now, it is one of the luxurious heritage hotels of India.


Rajwant Palace, Rajpipla

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The Rajvant Palace of Rajpipla is the most popular film/movie location of Gujarat. There was already various films shooting has been done in the royal palace of Rajpipla. The Royal Palace is also used as the most popular destination for wedding in the state. The management of the palace also provides special packages for honeymoon, wedding and school visits.
Raj Mahal, Wadhvan
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The Raj Mahal is the perfect vacation destination in the state of Gujarat. It is situated in the heart of Wadhvan city of Surendranagar district. The Palace have been spread in 14 acres of land. It was built in the 19th century for the use of Royal Family of Wadhvan. Before some years ago, it was converted into a heritage hotel.

Khirasara Palace, Rajkot
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The Khirasara Palace is the most popular and the fastest growing heritage hotel in Gujarat. They provide the best guest service and they have familiar staff which will make your day memorable. The Palace has amazing interior design and the historical architecture. They have reasonable rates to attract more visitors in the palace.


Balaram Palace, palanpur
Balaram Palace is a palace situated on the bank of Balaram River in Chitrasani village of Banaskantha district of Gujarat, India. It is now converted into hotel. 
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Balaram Palace once the hunting retreat of the Lohani Nawab of Palanpur, is now a Heritage Classic hotel. It was built between 1922-1936 by the 29th ruler of Palanpur, His Highness Zubd-ul-Mulk Dewan Mahakhan Nawab Sir Taley Muhammad Khan Lohani. It is a graceful manifestation of neo-classical and baroque architectural style. Situated amidst the Aravallis in the 542 sq. kms of Balaram Ambaji Reserve Forest at the tip of North Gujarat it borders Rajasthan. The palace is set in 13 acres of terraced upland rising from a hilly stream and surrounded by lush green gardens and designed flower beds. The palace was visited by several dignitaries during the British Raj, including Lord Mountbatten.

A stay in the palace takes the tourist into the bygone Nawabi period to experience the real Nawabi ambience and architecture of northern Gujarat. The palatial huge rooms with antiques all around give a sense of royalty. The hunting point existed 3/4th of a century back. Everything around is picturesque and nature is at its best.

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02 जनवरी 2019

3:49 pm

Temple of Ambaji : A big Temple of Gujarat

Ambaji Temple of navratri
Ambaji Temple of Navratri

        Ambaji is a very famous pilgrim center situated near the border of Rajasthan and near the mountains of Aravalli in the north of Gujarat. Puranas(scripture) have written that there was Amikkavan(Jungle name) here. Ambaji is situated between mountains of Aravalli on a height of 1580 feet above sea level. There is no goddess statue worshiped in Ambaji temple. But the Viceroy is worshiped. This machine is a mechanism that is associated with the original machine of Ujjain as well as Nepal's Shakti Peethas and is the proportion of character in the Yantra(traveling). This yantra is worshiped every month of the eighth month. In this pilgrimage, there are twelve men traveling for darshan(SIGHT). A large number of pilgrims come here every month and offer prayers to the top of the temple. Religiously Ambaji is an important place in the Shakti Peeth of India. This area is the birthplace of the Saraswati river and the medieval place of Shakti. Ambika is considered to be a part of the cave in Gabbar's hill, two kilometers away from Ambaji. Navratri festival is celebrated in Ambaji very festivities. Near the temple, the great architectural art is situated in the ancient times of Mann Sarovar(sea). Where Krishna's Chaul action is believed to have been done

           In the temple of Ambaji, Mataji's belief and faith are very special among people. Originally, this temple was a small number of years ago, but as soon as the time passed, the temple is now being built by the Tribes of the magnificent temple of the temple, with the improvement of its highest elevation.

              Right now the top of the temple is made of pure gold. There is a large mansion in front of the temple and Mataji is in the sanctum in the sanctuary. It is such a thing to remember that the pilgrims come here in such a large number but they may not know that there is no idol of mother in the original place of Mataji, but in such a way, the costumes and jewelery are arranged in such a way that in order to show the darshan to the morning, In the afternoon and in the evening, there are different types of darshan, which are held on the date of death. This mother has been burning the two lamps of Clarified butter (ghee) for many years.
Get of Ambaji
Get of Ambaji

                  There is a lot of belief in Ambassador of Gujarat in the state of Gujarat. Ambaji is located in the southwest of Arvalli mountains in the hill of Arasur. There is a village called 'Arasur', almost twelve times from Abu Road station, and this temple has a temple of Ambaji in this village. The main temple in the village of Arasur, surrounded by inns, prasadi(blessed food) shops and mostly mountainous people called Bhouda(TRIBESMAN), their hilt appears. This pilgrimage is also done by pilgrims.

Ambaji Gabber
Gabber of Ambaji

          Two special features of Ambaji are very special. One does not have the custom to use oil in Ambaji's work. It must be burnt in the fire. Do not eat oil. It can not be done in the head as well but ghee can be poured. Secondly, the sanctity of the woman should be maintained in this place of Mataji. No woman can be made fun of any woman. The adultery is gone, but within the boundaries of the village, it is not possible to associate with those days. Believing that a woman is angry with her, she gets angry and is seriously injured. As a result of this faith, pilgrims remain in this place due to the sanctity.

           In Ambaji, two to three fairs are filled in the year and Bhavai(folk dance)  is performed during the fair. A fair is held here in every Bhadravi punnam(Indian month and date) temple and at this time, a large number of pilgrims visit the place of Ambaji pilgrimage.

Legend of Ambaji Temple

The temple of Ambasir of Arasur is believed to be ancient times from Lord Krishna in the legend. It is believed that Lord Krishna had come to bring his childhood to this place. It is believed that Rukmini worshiped this Mataji. If you leave these myths and check historical evidence, then Maharana Shree Maldev VS Yavna at the temple on the banks of Mansarovar. Articles 1415 (1359 AD) are found. One in the center of the temple inside the temple of Ambaji 1601 is an article. In it, Rao Bharmalli's queen has several things to offer to her, she is from the 16th century. One another In the 1779 article there is an innkeeper's details. Meaning Is. From 14th century, the belief of Aasaru's Ambaji continues. But it is possible that the glory of this place is continuing for the previous buses and three hundred years. Because there is a village by Kumbhariya near Ambaji. In this village there are Jain darasars(jain temple) of Vimal Shah's marble wheel.
Jain temple (kumbhariya dehra)
Kumbhariya for Jain temple
There are myths about these shrines that, apart from the money given by Ambaji, Viml Shah built 360 jain temple at this place, but Mataji asked, 'Who is this support to make (jain temple)Dehra?' Then the vimalshah replied that make support Guru's. With this response, Mataji(goddess) burned the houses and left saved only five.

According to the story of Goddess Shakti, Mahishasura pleaded Agnivedev(fire god) to be pleased, he had promised that he could not be killed with the weapons named Nargis. With this blessing, he defeated the gods and won Indraasan(god place) and destroyed the Ashramas(boarding) of Rishis. Then decided to win Vishnulok(main god place) and Kailash(main god place). all Gods asked Lord Shiva's help. shiva told them to worship the goddess Shakti, so the spiritual power manifested, and they destroyed Mahishasur. So Devi is known as Mahishasur-Mardini.
Statue of Ambaji goddess
Ambaji Shakti of Statue

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7:51 am

Statue of unity : Know these 10 things of the Statue of Unity will be proud of every countryman

         
Statue of Unity
               There are discussions of the Statue of Unity worldwide. Know about the 10 specialties of this statue, which is a matter of pride for every Indian.

1. Larsen & Turbo Company claims that the Statue of Unity built in honor of Sardar Vallabhbhai Patel is the world's tallest statue.
2. The statue is 182 meters high. The Statue of Unity is even higher than the statue of Intel in China and its height is twice the Statue of Liberty.
3. The Statue of Unity has just become ready for 33 months, which is also a record. According to the company, it took 11 years for the Buddha statue in China's Spring Temple.
4. L & T said in its official statement that this idol has been prepared at a cost of Rs 2,989 crore.
5. Every work except for the bronze return to the Statue of Unity has happened in India. The Statue of Unity is indigenous.
6. The statue is on the Narmada River at a distance of 3.5 kilometers from Sardar Sarovar dam.
7. The total weight of the Statue of Unity is 1700 tonnes. Its height is 522 feet and 182 meters. The length of the foot is 80 feet, the 70 feet shoulder is 140 feet, and the height of the face is 70 feet.
8. Building of the Statue of Unity Padma Vibhushan honored Rao v. It is in the surveillance.
9. Sardar Sarovar dam, Satpuda and Vindhya mountain can be seen from the Statue of Unity. At a time, 40 people can see this scene from the gallery here.
10. The Statue of Unity is estimated to have 15,000 visitors every day to see.

31 दिसंबर 2018

4:00 pm

This is Gujarat's village which also shying the development of the city, 7000 NRI will be come motherland.(Dharmaj)

    
Dharmaj
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     Imagine the village, the lack of basic necessities such as hazardous construction of any kind of town planning, raw material flowing through dirt roads, open and festive sewers, ground water and dirt kingdom, power and water, and education and health infrastructure. In the absence of the facility, the image of rural lifestyle filled with inconvenience and conflict, stems from the mentality. But you will be surprised to know that there is only one village in Gujarat that you will find specific in any country of the world, the name of this village is Dharmaj .... The country's Prime Minister Narendra Modi has praised the village and the village should be imitated by other villages for development. He also said that Dharmaj-Day will be celebrated on 12th January in Dharmaj village.

       To celebrate Dharmaj-din, there are 7000 to 8000 religious people living in the country and abroad. Since most of the NRIs are coming here, its arrangements are still in full swing. The team for which Micro Planning has already been active in the religion.This time Dharmaj-Day theme is based on yellow color. So all those guests who are in Dharmaj Day will wear yellow clothes. This time, as the chief guest, the Mumbai business tycoon and former Sheriff Dr.Mohan Patel and British De High Commissioner Geoff Wayne is going to be specially affectionate.
Dharmaj farm
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       Here, agriculture and animal husbandry also happen and factories in the industrial area are also blessed. Bullets and buggies are also run on highways and on the other hand, expensive cars like BMW and Audi also run foreign cars. Here, the village co-operatives are also functional and foreign banks are also in the fray. Here, there are also Ayurvedic clinics and corporate hospitals. Here, there are also ideal government schools providing primary education and NRI is also an International Residential School for Children.
Lake of dharmaj village
Dharmej lack

         Here, water is also available in the well and gram panchayat is also supplied from the RO filtering plant to domestic water at home. Here, there are also luxurious bungalows with creative architecture, and old-fashioned wonderful mansions are also made of ancient style. Here, there are also hotels offering traditional cuisine like Rotta(indian bread) and Vegetables, and there is also an International Food Chain serving pizza-burgers. Here, there are many families in which one saves a bridal property by cultivating a brother and another brother leads to economic viability by working hard to work abroad. 

        But, the most important thing is that the values ​​of family values ​​in the religion, honor of elders, love for children, compassion for the poor, respect for society, pride of hometown for their village and the spirit of homelessness are intact. This is the only village in the world that has published books and cofi table books on its geography, history, present and future. Not only that, the village's own website, the village's aliotic song and logo are also there.
Dharmaj gam
Dharmej village

       There are currently ten thousand people living in Dharmaj village. But, the leaders of the village say that more than two thousand families of Dharmaj are living in other countries of the world. If everyone comes back, then there will be another new village development in front of Dharmaj. The contribution of the local people to the development of the religion is the economic contribution of religious people living abroad with dignity, honesty, hard work and transparent administration.
Dharmaj highschool
Dharmej school

        Dharmaj people who are live in  to foreign countries are paying special attention to the education of children. You will be surprised to know that in 1904, an advocate named Zaverbhai Dongarbhai Patel started English medium school in Std-1 to Std-3 in Dharmaj. At that time the number of students was 70. In 1955, the number of students in this school was 510. At present, various schools are available for every phase of society in Dharmaj. Here, students can study from KG to PG and for that they do not have to go to another city or village. A system that provides complete education in its village is available. Besides, there is also a special library facility for students.

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